शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016

दरदिया होता ये देवरु -डॉ मुकेश पाण्डेय

दरदिया होता ये देवरु , दरदिया होता ये देवरु
पिए द  दूध आ हरदिया  बड़ा दरदिया होता ये देवरु

तोहार भैया बाड़े कसईया  खूब हिलवले पलंग हो
चुमी के ओठवा मार्ले चोटवा दरद होता एके अलंग हो
दरदिया होता ये देवरु , दरदिया होता ये देवरु
पिए द  दूध आ हरदिया  बड़ा दरदिया होता ये देवरु


टूटे बदनिया पूरा जवनिया भईल बानी लाचार हो 
कईनी ह जतन तेल नवरतन मलाल बानी कपार हो 
दरदिया होता ये देवरु , दरदिया होता ये देवरु
पिए द  दूध आ हरदिया  बड़ा दरदिया होता ये देवरु 


पाण्डेय मुकेश कईले कलेश मेहर के मरम  ना जानेले 
जागेला ताव त  करेले छाव देहि प हमरा फानेले 
दरदिया होता ये देवरु , दरदिया होता ये देवरु
पिए द  दूध आ हरदिया  बड़ा दरदिया होता ये देवरु