ब्लड
निर्देशक - संजीव डब्लू
कहानी - संजीव डब्लू
पटकथा , संवाद व् गीत - डॉ मुकेश पांडेय
एसोसिएट निर्देशन - वीरेंद्र शर्मा
सह निर्माता - रघुराज ,देवेन्द्र
संगीत -बिटू इंदौरिया
पात्र -परिचय
राहुल - [२५ साल ] कल्ब का मालिक
विक्की -[२८ साल ] स्ट्रगलर एक्टर
समीर -[२६ साल ] संवेदन शील ,होनहार
टीना -[२२ साल ] एयरहोस्टेस
समीरा -[१८ साल ] स्टूडेंट
राजू रंगीला-[२८ साल ] हाजिरजवाब ,फ़ोटोग्राफ़र
जैस्मिन -[२० साल ]मासूम फैशनेबल लड़की
मोहन जी दादा -[४५ साल ] सी-ग्रेड फिल्म निर्माता
छेदिया [१६ साल ] नौकर
मुन्नी बाई [२५ साल ] नौकरानी]
बुलेट सिंह [४० साल ] हवेली का मालिक
बलजीत [२५ साल ] पुलिस इन्स्पेक्टर
१ -- फिल्म की शुरुआत एक ऐसे युगल जोड़े से होती हैं जो हनीमून मनाने एक हवेली में आते हैं ,बेडरूम में प्रवेश करते ही लड़की थकावट से रिलीफ़ लेने वाश-रूम में जाती हैं , आने के बाद अपने जोड़े से लिपट जाती हैं
धीरे-धीरे इनके वस्त्र उतरने लगते हैं। ...
इधर साथ ही एक साए के कदमों की आहट इनके समीप आने की आहीस्ता -आहीस्ता कोशिश करता हैं और इनकी तरफ़ बढ़ा आ रहा होता है।
ये दोनों इससे बे-फ़िक्र अपने धुन और रुमानियत में मशगूल एक दूसरे में समा जाने को आतुर धीरे-धीरे बिस्तर की तरफ़ बढ़ते हैं और फिर आलिंगन हो जाते हैं। रोमांटिक गीत के धुन पर ये अपने प्रणय-क्रिया में लगे ही होते हैं की अचानक लड़का बड़े जोर से चीख़ पड़ता हैं जो की उस वक़्त लड़की के ऊपर होता है ,इससे पहले की लड़की कुछ समझ पाए वो धारदार हथियार जो क्षण -भर पहले लड़के के पीठ में चुभा था वो वहीं धारदार हथियार उस साये के द्वारा लड़की के पेट में गोद दिया जाता हैं। हथियार पेट में चुभाने के उपरांत जैसे ही बाहर खिंचा जाता हैं उससे टपक रहे ख़ून के क़तरों से हमारे फ़िल्म का नाम ब्लड का टाइटिल लिखा जाएगा।
2 --- इसके बाद कहानी सीधे एक डांस क्लब में हो रही एक पार्टी पर आ जाती हैं जहाँ फ़्यूजन संगीत पर अर्द्धनग्न कपड़ों में युवा लड़के लड़कियां नाच रहे हैं ,बेसुध बेपरवाह इन्होने शराब और चरस ड्रग्स का इतना ओभर -डोज ले रखा है की इनके बेतरतीब कपड़ों की भी इन्हें सुध नहीं है। काउंटर के पास ये तेज़ आवाज़ में सिर्फ़ अपना पैग मांगने जाते हैं तभी इनकी आवाज़ हमें सुनाई पड़ती है , वरना संगीत के शोर-शराबे में हमें इनके महज़ होठ फड़फड़ाते ही दिखाई पड़ते हैं।
इनके पात्र परिचय कुछ इस प्रकार के हैं। .. इनमें क्लब का जो मालिक है राहुल [उम्र -25 साल ] लम्बे कद का खूबसूरत नौजवान ,लड़कियों का शौक़ीन तथा नए दोस्त बनाने और उन्हें अपने पब में बुलाकर अपनी किराए की बुलाई हुई मॉडलों पर पैसे लुटवाने का अच्छा हुनर होता हैं। इसकी एक माशूका जो एयरहोस्टेस होती हैं नाम है टीना। टीना जो की स्वभाव से हरफ़नमौला बिंदास हुस्न की मालकिन और निहायत ही बोल्ड और रंगीन मिज़ाज की होती है। उम्र तक़रीबन २२ साल। आज संयोग से इसकी बहन समीरा उम्र २० साल जो बिदेश में पढ़ती है ,यहाँ आई हुई है और इस पार्टी का मक़सद भी उसके जन्मदिन को सेलिब्रेट करने का ही होता है। राहुल अचानक उसे नशे की धुन में डांस फ्लोर की तरफ़ खींचता है साथ ही टीना को भी आमंत्रित करता है डांस के लिए समीरा अचानक बोल पड़ती है उसकी आवाज़ राहुल को इतना पसंद आता है
की वो क्लब का साउंड बंद करने का आदेश दे बैठता है ,राहुल समीरा से उसके ख़ास गीत का फ़रमाईश करता है जिसपर की वो डांस कर सके जैसे ही समीरा बोलने की कोशिश करती है उसे बिच में रोकते हुवे राहुल अपने दोस्तों का परिचय कराने की उससे पहल करता है। समीरा चुप......
राहुल एक-एक कर अपने दोस्तों का परिचय कराता है पहले विक्की को बुलाता जिसकी उम्र 28 साल यह एक स्ट्रगलर एक्टर होता है दूसरा समीर जिसकी उम्र 26 साल पढ़ने में बहुत तेज ,आशिक़ -मिज़ाज ,मिलनसार समीरा सबसे हाथ मिलाती है और फिर गले भी मिलती है। समीरा आज अपनी बहन टीना से ख़ूबसूरत लग रही है वो अपने एक ख़ास गीत जो हमारे ही फिल्म का होगा को बजाने की पहल करती है। वो डिस्कोनुमा गीत बजते ही सभी जोश और उन्माद में आ कर नाचने लगते हैं
३. जैस्मिन जो की एक अत्यन्त ख़ूबसूरत और नवोदित मॉडल होती है स्वभाव से ये मासूम और बहुत ही भोली-भाली होती है इसे हिरोईन बनने का इतना ख़तरनाक जूनून सवार होता है की ये इसके लिए किसी के साथ कुछ भी करने पर आमादा रहती है चाहे जो भी इसे अच्छे से फिल्म में लांच कर सके। ऐसे ही एक सी-ग्रेड फ़िल्म के प्रड्यूसर मोहन दादा के सम्पर्क में जैस्मिन रहती है जो की इसे बड़ी हिरोईन बनाने का ख़्वाब इसे दिखा चुके होते हैं। वो इसके साथ सम्बन्ध-रत भी रहते हैं। वो अक़्सर इसे कहीं भी छू देते हैं जिसका ये तनिक भी बुरा नहीं मानती। यह सोच कर की शायद फ़िल्म लाईन में ऐसे ही होता हो। एक दिन मोहन दादा अपनी एक फ़िल्म रजाई में सगाई के शूट की तैयारी हेतु जैस्मिन का पोर्टफ़ोलियो बनवाने के लिए अपने चहेते फोटोग्राफर राजू रंगीला के स्टूडियो में उसे लेकर जाते है साथ ही जैस्मिन से गाह-ए -बगाहे चिपक भी रहे होते हैं
राजू रंगीला इससे पहले इतनी मस्त मॉडल या कहें ऐसी लड़की अपने पुरे फ़िल्मी कैरियर में नहीं देखा होता है ,वो मोहन दादा से इसे काटने की जुगत में लग जाता हैं। और क़ामयाब भी रहता है। जैस्मिन को बड़े प्रोडक्सन और बड़े स्टार के अपोजिट हिरोईन बनाने के झूठे सपने बेंच कर फंसा लेता है और उसे आउट डोर फोटो शूट के लिए तैयार करता है।
अचानक इधर उसके फोटो स्टूडियो में 5 लोग प्रवेश करते हैं ये क्रमशः राहुल ,विक्की ,समीर ,टीना और समीरा होते हैं राहुल अपनी गर्ल-फ्रेंड टीना के फोटो शूट की बात राजू रंगीला से करता है राजू रंगीला अपने आउट-डोर शूट से उन्हें अवगत कराता है ,इस बात पर राहुल तथा उसके सभी दोस्त उछल पड़ते हैं और कह उठते हैं की ये तो और अच्छी बात है। और फिर राजू के स्टूडियो में ही उनके बाहर जाने का समय जगह और पैसे का फ़ाईनल बात-चित पूरा होता है। यही जैस्मिन के मोहन दादा अपनी फिल्म का एक सांग प्ले कर उसका डांस ऑडिशन का वीडियो बनवाते हैं [हमारे फिल्म का भोजपुरी टच ये सरा गीत यहाँ होगा ]
इधर जहाँ ये सातों पहुँचने वाले होते है वहां की घटना भी कुछ काम अज़ीब और हास्यस्पद नहीं होती !! छेदिया नाम का एक केयर-टेकर या यूँ कहे नौकर जो स्वभाव से समलैंगिक होता है एक नौकरानी को बुला कर साफ -सफ़ाई करा रहा होता हैं नौकरानी को छेदिया इतना पसंद होता हैं की अपने जलवे दिखा नाज-ओ- नख़रे कर-कर के या फिर अपने आँचल को अपने स्तनों से नीचे कर अपने उभारों को दिखा कर उसे प्रभावित करने की असम्भव कोशिश करती है ,पर छेदिया है की उसे अपने ही छेद की परवाह होती है मतलब की वो एक "गे " होता है जिसे एक मस्त हठ्ठे-कठ्ठे नौजवान लड़के की यौनिक भूख होती है। उसे लगता है की आने वाले 7 मेहमानों में कोई तो होगा जो उसकी कामेक्षा को अबकी पूरी कर ही देगा।
४. राहुल अब अपनी बड़ी गाड़ी में टीना और समीरा को लेकर उस दिए हुवे ख़ास स्थान पर पहुँचता है जहाँ सबको पहुंचना है विक्की और समीर पहले से ही वहां अपना हैण्ड बैग लेकर पहुंचे हुवे हैं सभी राजू औस जैस्मिन का इंतज़ार कर रहे होते हैं मालूम चलता है की ये दोनों यहाँ इतने पहले पहुँच चुके होते हैं की थक हार कर बगल के पार्क में रोमैंस और फिल्मों में जैस्मिन को गरम सीन कैसे करना है इसपर चर्चा और मशवरा कर रहे होते हैं
फिर टीना के फोन करने पर कि राजू सर आप कहाँ हैं। .. फिर राजू अपने स्टाइल में बोलता है जो की ज्यादा फनी होता है और जल्द ही पहुँचने का वादा करता है टीना जैसे ही फोन काटती है पीछे से राजू उसके कंधे पर हाथ रख कर अपने सबसे पहले पहुँचने का वृतांत करता है
सभी गाडी में अपने अपने अपने सामान के साथ सवार होते हैं रस्ते में भी कुछ अज़ीब-ओ -ग़रीब हंसी-रोमांस , फ़्लर्ट -चीटिंग और रूमानी घटनाएं एक-दूसरे के साथ घटती है कोई किसी को चाहता है तो कोई किसी को इग्नोर करते हुवे हवेली के दरवाजे पर पहुँचता है हवेली के दरवाज़े पर पहुंचते ही नौकर इनके स्वागत में शब्दों की लड़ियाँ लगा देता है कि साहब आप लोग तो कल से ही बुकिंग ले रखे थे। . इतना देर कैसे हुआ। राहुल अपनी बेवसी बताता है कि रस्ते में उसकी गाडी ख़राब हो गई थी और फिर हम लेट हो गए, फिर नौकर और नौकरानी उन्हें उन सबका कमरा बैडरूम नहाने जी जगह फिर आलिशान स्विंग पुल और उससे सटे वो गार्डन दिखाते है जिसे देखते ही सबकी आँखे फटी -की-फटी रह जाती है
यहीं पर कुछ दिल दहला देने वाली रहस्य्मयी घटनाएं , क़त्ल और सेक्स का मेल -जोल है जो सभी दर्शकों को चौक देगा। फ़िल्म का यहीं अंतिम क्लाइमेक्स हमारे फ़िल्म के नाम को सार्थक करेगा
