सोमवार, 14 सितंबर 2015

सारा सिस्टम जगह से घसक गईल रे [भोजपुरी गीत ] डॉ. मुकेश पाण्डेय

पहिला राते से पियवा चसक गईल रे 
सारा सिस्टम जगह से घसक गईल रे 

देंह झनझनाता कपार टनटनाता बढ़ल बा एतना प्रेसर 
रहिया चले में शरीर हिले अइसे जइसे हिलेला थरेशर 
हमरा चोली के सियन मसक गईल रे 


घर में घुस गईल गोड़वा दबाके धइलस त बाड़ा चिहुंकनी 
खेल गईल खेला उ पाके अकेला दईया रे बहुत कुहुकनी 
ऊ त मारी के माजा खसक गईल रे 

जान सांचो तू हमरा के भुला जईब का [ भोजपुरी गीत ] डॉ. मुकेश पाण्डेय

जान सांचो तू  हमरा के भुला जईब का 
दुःख हमके तू देके सुख पा जईब का 

जेठ के दुपहरी नियन डाहेला जुदाई 
लागता जुदाई तहार हमके मुवाई 
हमरा जिनगी में माहुर मिला जईब  का 


निंदिया हराम कईल पागल बनाके 
सुख नाही पईब राजा हमके रोवाके 
नाम तू बेवफ़ा में लिखवा जईब का 

उठता लहर लहंगवा में - [भोजपुरी गीत ] डॉ. मुकेश पाण्डेय

फीमेल -कसमस करता हमरो जोबनवा 
            कोरा में लेके सूत तू संघवा में 
           आवे जम्हाई कमरिया पिराता 
            उठता लहर लहंगवा में 

मेल - छोडब जो ढिल्ली देखे लगबु दिल्ली 
          माजा बरोबर दुनो जन के मिली 
         सेजिया प तोहके संघवे सुताईब 
        डूब  जाई देहिया पसिनवा में 
         पाँचे मिनट में जुड़ा जइबू गोरिया 
       उठी ना लहर लहंगवा में 

       चेचिस कसल बाटे बाड़ू मारुती 
      रफ़्तार धईला प फेंक देबू लुत्ती 
       मरद बिहारी ना तोहरा से हारी 
      पावर भरल मरदनवा में 
        पाँचे मिनट में जुड़ा जइबू गोरिया 
       उठी ना लहर लहंगवा में 
           

पढ़े वालन ख़ातिर लभ के पढ़ाई हउ [ भोजपुरी मुक्तक ] डॉ. मुकेश पाण्डेय

पढ़े वालन ख़ातिर लभ के पढ़ाई हउ 
पोखरा में बिछलाए वाला काई हउ 
लईकन के चूसनी जवनकन के मिसनी 
तू त बुढ़वन के आँख के दवाई हउ