खेत खरिहान में -सगरो सीवान में फ़हरेला अंचरा तोहार
ए गोरिया चल ना ,चल नदिया के पार
नदी के पार गोरी हमरो पलानी
हवे पिरितिया के उहे निशानी
घर बनइनि हम आन्ही से पूछ के
बहेला हवा हमरा खिड़की से पूछ के
चाँद के चंदनिया -शीतला के निंदिया नदिया करेले जुन्हार
ए गोरिया चल ना ,चल नदिया के पार
गलिया प तोहरो सुरुज के ललाई
हमरो पलनिया अंजोर होई जाई
फूल के छुईह तू तितली से पूछ के
आवे अन्हार उँहा बिजली से पूछ के
सुखला जवरवा में हहरत आषाढ़ में बन रसबुनिया के धार
ए गोरिया चल ना ,चल नदिया के पार
अंग अंग तहरो भरल सुघराई
ऐना में तहरो ना रुपवा समाई
उठिह भोरे अंगड़ाई से पूछ के
देखिह शीशा परछाई से पूछ के
अँखिया फ़रक जाई दर्पण दरक जाई
जब होई सोरहो सिंगार
ए गोरिया चल ना ,चल नदिया के पार