पड़े रोज सर्दी कइलन गवना बेदर्दी
हरदी छुटल नाहीं
जईब का कसे लगल ये सईयां वर्दी
हरदी छुटल नाहीं
हमरा सुरतिया के सोना झरी जइहें
केतनो कमईब मन बड़ा पछितइहें
गोरे -गोरे गलवा पर पड़ जइहें ज़र्दी
हरदी छुटल नाहीं
जईब का कसे लगल ये सईयां वर्दी
हरदी छुटल नाहीं
नाहीं जननी सजना सिपाही बाड़े रेल में
कबो मालगाड़ी पर चलेले कबो मेल में
छुट्टी तू बढ़ाल नाहीं चली गुंडागर्दी
हरदी छुटल नाहीं
जईब का कसे लगल ये सईयां वर्दी
हरदी छुटल नाहीं
हमरी जिनिगिया के तू ही संघाती
मुकेश"पर छोड़ल सईयां जवनिया के थाती
हम नाही जननी बाड़ एतना बेदर्दी
हरदी छुटल नाहीं
जईब का कसे लगल ये सईयां वर्दी
हरदी छुटल नाहीं
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