भक्ति करना राम की, नहीं कायर का काम
शीश उतारी जो हाथ धरे ,वहीँ ले हरि का नाम
[1] चलते हैं लाखों लोग यहाँ पर ,कुछ ही मंज़िल पाते हैं
इसलिए नहीं की राह कठिन इसलिए की रुक-रुक जाते हैं
मृत्यु से मत होना ग़ाफ़िल ,ज़िन्दगी इलहाम
[२] ज्ञानी से संगत कर लेना ,कुछ दूर तुम्हें ले जाएगा
कुछ दूर शास्त्र ले जाएंगे ,कुछ दूर गुरु पहुंचाएगा
आगे पथ अनजाना होगा ,मत करना विश्राम
[३] अपने जीवन की फ़िक्र करो ,परहित का तब ही ज़िक्र करो
ख़ुद गया नहीं जो मधुशाला ,भर पायेगा किसका प्याला
हो हृदय प्रेम से शून्य अगर ,तो मत करना प्रणाम
[४] बहुजन हिताय बहुजन सुखाय माना यह मन्त्र क़ीमती है
स्वांत सुखाय जो जी न सका ,ज़िन्दगी न उसपर रीझती है
पहले ख़ुद ग़ज़ल बन जा ,फिर दे अपना तान
क्रमशः.........................................