मंगलवार, 25 अगस्त 2015

एक बेर पाछे घूम के -डॉ मुकेश पाण्डेय

कुछ देर पहिले 
तू जवना मोड़ से गईल ह 
उ मोड़ अबहीं ले 
एगो शालीन उत्तेजना से 
थरथराता 
स्पंदित होता 
विस्मय से 
कि तू जाईयो सकेल का ?
जाहीं के बा त जा 
लेकिन वोह लेखा से मत जा 
जवना लेखा 
जाला चानी पर के  बार 
ओह लेखा से भी ना 
जवना लेखा 
माई बाप के बिलखत छोड़ 
परदेस में बस जातारें बेटा 
जइसे चल जाला सपना 
नींद से बाहर 
जे लेखा 
चल जाता लईकन के खेलवना 
स्कूल के मास्टर रिटायर होके 
अपना अपना घरे 
चल जालें 
बादल 
घुमड़ घुमड़ के आवता 
मगर बिना बरसलें चल जाता 
जा 
लेकिन वापस आवे के
 कवनो पगडण्डी ईयाद रखिह 
जा 
मगर 
ईयाद रखिह कि जाते जाते 
एक बेर पाछे घूम के 
देखल भी बहुत ज़रूरी होला 



















धीरे -धीरे चरण पखार ये सखी ,हमार मईया सुकवार -डॉ मुकेश पाण्डेय

धीरे -धीरे चरण पखारS ये सखी ,हमार मईया सुकवार 
मईया सुकवार हमार, मईया सुकवार हो 
दूरहिं से आरती उतारS ये सखी ,हमार मईया सुकवार 

देखिहS सखी केहु सटे नाहीं पंजरी 
राई-जवाइन अइंछ लागे नाही नजरी 
एके टक  रूप ना निहारS ये सखी ,हमार मईया सुकवार 

चम-चम चमकेला मुँह चुनमुनिया 
कह दिहS काजर लगा दी मलिनिया 
रची-रची कई दी सिंगारS ये सखी ,हमार मईया सुकवार 

पाण्डेय मुकेश"पूजन करीहें आके 
खुश करीहें माई के भजन सुनाके 
धन्य होई सेवका दुआरS ये सखी ,हमार मईया सुकवार 


सॉफ्टवेयर इंजीनयर - डॉ मुकेश पाण्डेय

मेरा एक मित्र सॉफ्टवेयर इंजीनयर है ,वो वाशरूम  का दरवाज़ा भी कार्ड स्वैप करके खोलने की कोशिश करता है ,क्यूंकि वो भूल ही जाता हैं की वो फ्रेश होने आया था न की कोडिंग करने।  अपनी गर्ल फ्रेंड को रन टाइम एरर बुलाता है तो अपनी वाइफ को प्रोडक्शन इशू कहता है 

पलाश के फूल - डॉ मुकेश पाण्डेय

वन प्रांतर जल उठा 
दहकते हुवे पलाश के फूलों से 
हाय! कैसी आग लगी है 
मेरे हिय में   

मोर पंख - डॉ मुकेश पाण्डेय

देखते -देखते शाम 
मेरे कमरे में 
जंगले से 
कुछ मोर पंख
 रख कर चली गयी 
मैं धीरे-धीरे उठी और 
बिना बताये अपनी कॉपी में 
छुपा लिया 
सुबह-सुबह 
बाग़ में गयी 
तो तितली ने 
ताना मारा 
चलो 
मुझसे बनती हो 
जाकर ज़रा शीशे में 
अपना चेहरा तो देखो 
तुम्हारी आँखों के जो 
लाल धागे हैं 
तुमसे कहीं आगे हैं। 


शायद - डॉ मुकेश पाण्डेय

मेरी दसों अंगुलियाँ
दसों दिशाओं में
बहती हुई दस नदिया हैं
इन्हें एक जगह सहेज कर रख दूँ
तो एक समुन्द्र
बन सकता है
शायद वह
तुम हो