आजा आजा सजाएँ अपना घर आँगन
ये दिवार बोलती है ,खिड़कियाँ भी खोलती है
डोलती है जैसे तेरा मेरा मन
आँखों का सपना अभी है अधूरा
प्यारा सा मुन्ना होगा तब होगा पूरा
फूलों की कलियों की चादर बिछाएंगे
हम दोनों मिल जुल के जीवन बिताएंगे
महकेंगे अपने प्यार के चमन
खुशियों भरा होगा संसार अपना
महकेगा हर पल प्यार अपना
गुजरेंगे दिन अपने अब हँसते हँसते
होंगे न कम अपने चाहत के रिश्ते
हरदम रहेंगे मगन