रविवार, 6 सितंबर 2015

आजा आजा सजाएँ अपना घर आँगन - डॉ. मुकेश पाण्डेय

आजा आजा सजाएँ   अपना घर आँगन 
ये दिवार बोलती है ,खिड़कियाँ भी खोलती है 
डोलती है जैसे तेरा मेरा मन 

आँखों का सपना अभी है अधूरा 
प्यारा सा मुन्ना होगा तब होगा पूरा 
फूलों की कलियों की चादर बिछाएंगे 
हम दोनों मिल जुल के जीवन बिताएंगे 
महकेंगे अपने प्यार के चमन 


खुशियों भरा होगा संसार अपना 
महकेगा हर पल प्यार अपना 
गुजरेंगे दिन अपने अब हँसते हँसते 
होंगे न कम अपने चाहत के रिश्ते 
हरदम रहेंगे मगन 

जबसे देखा है तुझे ऐ जाने जां - डॉ. मुकेश पाण्डेय

मेल -             जबसे देखा है तुझे ऐ जाने जां 
                     जैसे मुझको मिल गया सारा जहाँ 
फीमेल  -        तू मिला सबकुछ मिला दिल खिल गया 
                     हो गया रंगी नज़ारों का समां 

मेल               छा गयी देखो फ़िज़ा में मस्तियाँ 
                    जाने मन ये दिल दीवाना हो गया 
फीमेल          मुझको ये मौसम जवां लगने लगा 
                   चाहतों का रंग दिल में भर गया 
मेल             दिल में इक तूफान सा उठने लगा 
                  देख कर तेरी अदा ये शोख़ियाँ 


फीमेल       दिल के गुलशन में बहारें आ गयी 
                 खो गए हम इन नज़ारों में सनम 
मेल           तुम तो मेरी ज़िंदगी हो जान हो 
                जीते जी अब तो जुदा होंगे न हम 
फीमेल     तू मिला तो सारी खुशियाँ मिल गयी 
               तेरी बाँहों में है मेरा   आशियाँ 

ओ मेरे यार - डॉ. मुकेश पाण्डेय

बाँहों में आजा जानम दिल है बेक़रार 
तेरे बिना सीने में जलता है प्यार 
ओ मेरे यार 

चाहूँ ना छुवे तुझको पवन 
इसको तू कहले मेरी जलन 
एहसास मेरे करते हैं तुझसे बातें हजार 
ओ मेरे यार 


अपनी मुहब्बत को क्या नाम दूँ 
तू जो कहे वो अंजाम दूँ 
जागते सोते करता हूँ मैं अब तेरा इंतज़ार 
ओ मेरे यार 

बताऊँ किस तरह तुमको मेरी नज़रों में क्या तुम हो - डॉ. मुकेश पाण्डेय

बताऊँ किस तरह तुमको मेरी नज़रों में क्या तुम हो 
जो मैंने रब से मांगी है हमेशा वो दुआ तुम हो 

मिली है प्यार की दौलत उसे पाकर नहीं खोना 
मेरे महबूब तुम मुझसे कभी नाराज़ मत होना 
मैं मर जाऊं अगर महसूस हो मुझसे जो खफ़ा तुम हो 

किसी ने जो किया न हो लो मैं वो काम करता हूँ 
मैं अपना दिल मैं अपनी जान तुम्हारे नाम करता हूँ 
मैं प्यासा दरिया हूँ बरस जाओ घटा तुम हो 

मस्ती में डूबी जवानी है ,तू इश्क़ में मेरी दीवानी है - डॉ. मुकेश पाण्डेय

मस्ती में डूबी जवानी है ,तू इश्क़ में मेरी दीवानी है 
सीने से मेरे दिल गया ,तौबा क्या मुसीबत कर गया 

दिल में तेरे धड़कन बन के 
धड़कूँगा मैं सुन लो सनम 
सांसो में तेरे खुशबू बनके 
महका करेंगे सुन लो सनम 
मस्ती में डूबी जवानी है ,तू इश्क़ में मेरी दीवानी है 


मेरे लबों पे है ये दुआएँ 
सदियों सदियों तक हम चाहें 
प्यार भरे तुम सपने सजालो 
दीवाने को दिल में बसालो 
मस्ती में डूबी जवानी है ,तू इश्क़ में मेरी दीवानी है 

तेरे इश्क़ ने मुझको शोणिए पागल कर डाला - डॉ. मुकेश पाण्डेय

तेरे इश्क़ ने मुझको शोणिए पागल कर डाला 
तेरे  हुस्न से ख़ुश्बू बरसे आँखे मधुशाला 
हुस्न की रानी ,रूप की मल्लिका मैं हूँ तेरा मतवाला 

दिल नईयो मणदा एनु लाख मनावा 
मस्तानी चाल पे तेरी मर मर जांवा 
देख के तेरा रूप सलोना जागी बदन में ज्वाला 

ओ मेरी जिंदणी तू माणे न माणे 
मैं तुझको कितना चाहूँ अल्लाह जाणे 
साँझ सवेरे जपता हूँ मैं तेरे नाम की माला