सोमवार, 31 अगस्त 2015

हमार पिआस तू तहरा दुनिया के तराश बा [भोजपुरी मुक्तक ] डॉ.मुकेश पाण्डेय

हमार पिआस तू तहरा दुनिया के तराश बा 
ई हमार आग ह आ उहे तहार लूर 
हम जेह लेखा से बानी तहरा लगे 
तू अपना आप से बाड़ ओतने दूर 

तू पगलाईल छिछिआइल मछीआईल केतनो घूम [भोजपुरी मुक्तक ]डॉ.मुकेश पाण्डेय

तू पगलाईल छिछिआइल मछीआईल केतनो घूम 
देहियां हमरो तहरे देह के उम्मीदवार ह 
तू लुकाके जईब त जईब आखिर केने 
जेकरा के जिनगी कहेल उहे तहार यार ह 

सब सखिया मिल आरती गाव रुक्मणी जी के सईयां के -डॉ.मुकेश पाण्डेय

जग मग जग मग ज्योत जलल बा कृष्ण कन्हैया के 
सब सखिया मिल आरती गाव रुक्मणी जी के सईयां के 

आरती के थाल  सजाव -आस पड़ोस के बोलाव 
खुश होईहें मदन मुरारी ये सखी जदी जे मुरली बजाव 
ध्यान लगाके कर प्रार्थना ये जग के रचईया के 

रागी हउवें ना वैरागी -कृष्ण जी हउवें वीतरागी 
जे सखी दिल से करी आरती उहे बनी पुण्यभागी 
नटनागर नटवर मुरलीधर भज ले खेल खेलइया के 

पाण्डेय मुकेश जदी गईब मनचाहा आशीष पईब 
कृष्ण के महिमा कईसन होला आजे तुहू बुझ जईब 
प्रेम नाम के मिले औषधी कृष्ण नाम जपवैया के 

बोल ये बलमुआ कबले बेलना लेके सुतीं - डॉ.मुकेश पाण्डेय

गरम भईल साइलेंसर अब त फ़ेंकतावे लुत्ती 
बोल ये बलमुआ कबले बेलना लेके सुतीं 

डहके छत्तीस अभरनवा,ना अईल घरे सजनवा 
लागे ना कतहीं पर मनवा बलम जी ,तन से पराईल परनवा 
 अगिया जवन तू बाड़ लगवले दोसरा से ना बुति 
बोल ये बलमुआ कबले बेलना लेके सुतीं 


ना चाहीं हार हँसुलिया हिरा मोती ना सोना चानी 
माने ना आपन जवनिया ए राजा केकरा से कहीं परेशानी 
जुलुम बा कईले जोबनवा घरे आजा लेके छुट्टी 
बोल ये बलमुआ कबले बेलना लेके सुतीं 


सुन ए हो सजनवा पागल भईल बाटे मनवा 
कोरा उठाके हमके देवरवा,पाण्डेय मुकेश"लिहि जनवा 
खिड़की में से कईके इशारा  बोलावे पिछूति 
बोल ये बलमुआ कबले बेलना लेके सुतीं