रविवार, 23 अगस्त 2015

कईसे न भर आई मुँहवा में पनिया - डॉ. मुकेश पाण्डेय

कईसे न भर आई मुँहवा में पनिया 
अँखियाँ तोहार बाटे दारू के दोकनिया 

आगे पीछे तहरा के लोगवा निरेखे 
तोहरी सुरतिया के घूर -घूर के देखे 
ढाहेला ग़ज़ब तोहरी नाक के नथुनिया 
अँखियाँ तोहार बाटे दारू के दोकनिया 

नदिया के पनिया में खेलेलु झिझिरिया 
झुलुआ पे झूली झूली गावेलु कजरिया 
सिनवा पर फिसलेला तोहरी ओढ़निया 
अँखियाँ तोहार बाटे दारू के दोकनिया 

केहु कहे गोरी केहु कहेला सजनिया 
केहु जानेला आपन बाड़ी  धनिया 
केहु पुकारे तोहके कहिके नागिनिया 
अँखियाँ तोहार बाटे दारू के दोकनिया 


अँखिया लड़ाव चाहे कर तू ठिठोली 
मुकेश" कहेलें सुन-सुन हमजोली 
डंस लेबु जेकरा के मांगी नाहीं पनिया 
अँखियाँ तोहार बाटे दारू के दोकनिया 



















पहिले तकरार हो गईल ,धीरे धीरे प्यार हो गईल - भोजपुरी ग़ज़ल - डॉ. मुकेश पाण्डेय

पहिले  तकरार हो गईल ,धीरे धीरे प्यार हो गईल 
जब नैना चार हो गईल,धीरे धीरे प्यार हो गईल 
 
डगर डगर गांव में नदी तीरे पिपरा के छाँव में 
मौसम गुलज़ार हो गईल,धीरे धीरे प्यार हो गईल  

फूल में पराग में गीत गंध गमकेला राग में 
भंवरा गुंजार हो गईल ,धीरे धीरे प्यार हो गईल 

रंग में बहार में बड़ा मज़ा फ़गुनी बयार में 
देहिया कचनार हो गईल,धीरे धीरे प्यार हो गईल 

प्रीत के बोखार बा डोली के इंतज़ार बा 
मुकेश" दिलदार हो गईल,धीरे धीरे प्यार हो गईल 





भोजपुरी मुक्तक़ - [१ ] डॉ. मुकेश पाण्डेय

तूर के फेंक द चाहे मल मिस 
ई फुलवा डाल के ह त मुरझईबे करी 
ई करेज तोहरा प्रेम के कचारल हटे 
सोझा परबु त देख के पिरईबे करी  



जीवन का संचार करेगा - डॉ. मुकेश पाण्डेय

जीवन का संचार करेगा 
भव  सागर से पार करेगा 
भक्ति का भंडार भरेगा 
हम  सबका उद्धार करेगा 
पूरी सबकी आस करेगा 
काम क्रोध का नाश करेगा 
हम सबका का है सृजन हारा 
शिव भोला है सबका न्यारा 
दुनिया का वो पालनहारा