रविवार, 30 अगस्त 2015

ननदी नतिनिया के होइ जहिया शादी - डॉ.मुकेश पाण्डेय

ननदी नतिनिया के होइ जहिया शादी 
काली माई के पियरी चढ़ाइब परसादी 

बोलतिया एक एक भाषा गढ़ी गढ़ी के 
शासन चलावतिया अम्मो जी से बढ़ी के 
हमरा जरी लागल बिया जइसे जर मियादी 

रहतिया हरदम कहले टहल पर 
कर्फ्यू लगवले बिया हंसलो बोलल पर 
मुठ्ठी में दबवले बिया हमरो आज़ादी 


सुखवा ससुरवा के कईले बिया सपना 
हमके नचावतिया अंगूरी प अपना 
लागता जवनिया संवुसे माटी में मिलादी 

आँखों से आंसू निकले लाली सी छा गयी - डॉ.मुकेश पाण्डेय

आँखों से आंसू निकले लाली सी छा गयी 
जाने वाला चला गया यादें रुला गयी 

हूँ मैं उसकी वफ़ाओं से वाकिफ़ 
सारी झूठी अदाओं से वाकिफ़ 
फिर भी तमन्ना उसकी दिल को तड़पा गयी 

क्या मैं बातें बताऊँ सौदाई की 
झुकी आँखें देखी है हरजाई की 
ना जाने क्यूँ फिर याद उसकी आ गयी 

आँखों में आँसू क्यूँ है विदाई हो रही है - डॉ.मुकेश पाण्डेय

आँखों में आँसू क्यूँ है विदाई हो रही है 
ग़मो का दौर भी आये सदा मुस्काते रहना है 
बाबुल के घर से जाना है पिया के घर को जाना है 


आँगन की कलियाँ मुरझा रही हैं 
बेटी पिया के घर जा रही है 
बेटी दुलारी की डोली जा रही है 
ग़मो का दौर भी आये सदा मुस्काते रहना है 
बाबुल के घर से जाना है पिया के घर को जाना है 


आँगन सुना सुना हुआ है 
बेटी तुझको मेरी दुआ है 
प्यार से पाला जिसको दूर जा रही है 
ग़मो का दौर भी आये सदा मुस्काते रहना है 
बाबुल के घर से जाना है पिया के घर को जाना है 

क्या पता है तुझको कब ज़िंदगी की शाम ढल जाए - डॉ.मुकेश पाण्डेय

क्या पता है तुझको कब ज़िंदगी की शाम ढल जाए 
कर भलाई ऐसी जिससे ज़िंदगी सम्हल जाए 

ईंटो के पहाड़ तेरे यहीं पे छूट जायेंगे 
मीट्टी के बदन ये तेरे पल में टूट जायेंगे 
हृदय के हिमालय से गंगा निकल आए 

ज़िंदगी की आस दुनिया का संवर जाना है 
मौत इंसान के सपनो का बिखर जाना है 
मेरी कोशिश है यहीं सूरत ये बदल जाए 

प्यार के दीवाना हईं हमरा ना डर बा - डॉ.मुकेश पाण्डेय

जहाँ तहाँ रहतानी हमरा ना घर बा 
प्यार के दीवाना हईं हमरा ना डर बा 

बाज़ी लगवले बानी जान आपन जान के 
ले ल परीक्षा आके प्यारी इत्मिनान से 
काट द कटार से झुकल हमार सर बा 

कहबु त लड़ जाइब हमहुँ तूफ़ान से 
करब तकरार हम दुनिया जहान से 
कर तानी वादा हम ना तनिकी कसर बा 


हम हईं चंदा मामा तू हउ चकोरी 
आके करेज में समाजा ये गोरी 
पाण्डेय मुकेश "ऊपर हरदम नज़र बा 

देवर संघे रात भर होखता लड़ाई - डॉ.मुकेश पाण्डेय

चर चर चरकतिया रोजे चारपाई 
देवर संघे रात भर होखता लड़ाई 

जेकरा थाली में रोज खा तारी खाना 
ओहि थाली में छेद करेली जनाना 
पिया परदेसिया के खा तारी कमाई 


भारत के नारी होली सन पतिव्रता 
घर के बनावे वाली मेन कार्यकर्ता 
अइसे जे होइ त काम गड़बड़ाई 

मन नईखे मानत त मनावे के चाहीं 
दोसरा के परो जनि कबो परछाहीं 
पाण्डेय मुकेश के फंसवले बिया भाई 

राजा लईका बानी - डॉ.मुकेश पाण्डेय

ले अईल गवना अबहीं  छोट बा खेलौना राजा लईका बानी 
सुतीं बिछाके अलगे रउरा बिछौना राजा लईका बानी 

कोमल कलाई हमार धरीं जनी जबरी 
रुई अस देंह हमार रगरी ना सगरी 
हमरा के बुझीं जनी मन के बझवना  राजा लईका बानी 


फरे दीं फुलाए दीं गोटाये दीं ये राजा जी 
नान्हे रे उमिरिया में जन दीं साजा जी 
कली कुम्हिलाईल नाहीं फूलल ना फुलौना ,राजा लईका बानी 


पाण्डेय मुकेश पिया धीर तनी धरीं 
ऊँच नीच हो जाई अइसे ना करीं 
होखे दीं सेयान ना त रउरे होखीं बौना ,राजा लईका बानी 

पतली कमरिया के तिरछी नज़रिया के सगरो धमाल बा - डॉ.मुकेश पाण्डेय

पतली कमरिया के तिरछी नज़रिया के सगरो धमाल बा 
ये गोरी तहरा रूप के शेयर में बम्पर उछाल बा 

बोलेलु त मन करे चुप-चाप सुनी ,हँसेलु त टुकुर टुकुर देखीं 
चलेलु त पीछे-पीछे हमहुँ चलीं हर घरी तोहके निरेखी 
साँवली सुरतिया के पगली पिरितिया के ई सब कमाल बा 


एक त सुनरता ओह पर सादगी दुनो गुन बाटे हो खास 
तू ही एह जुग के बाड़ू मुमताज़ हो बाक़ी सब कुछ बक़वास 
चेहरा पर देखी देखी मन के सुनरता दिल मोर बेहाल बा 



है दस्तूर दुनिया का सदियों पुराना - डॉ.मुकेश पाण्डेय

है दस्तूर दुनिया का सदियों पुराना 
विदा की घडी में गले से लगाना 

हमें तो पता है मुहब्बत की बातें 
ज़माने की बातें तो जाने जमाना 

कई नाम रखे हैं हमने तुम्हारे 
तुम्हे जो पसंद हो हमें भी बताना 

ये माना निगाहें नहीं साथ देंगी 
मगर तुम बिछड़ते हुवे मुस्कुराना 

कोई दर्द गाता  है सारे जहाँ में 
कभी तुम अकेले में सुनना तराना 

ये धर्मों के झगड़े दिलों की लकीरें 
जरा प्यार का रंग इन पर चढ़ाना 

बहुत याद आएँगी बातें तुम्हारी 
ये चुप-चुप सा रहना निगाहें चुराना 

ये दुनिया बहुत खूबसूरत है साथी 
इसे और भी खूबसूरत बनाना 





तुम्हें मन की बातें बताने का मन है - डॉ.मुकेश पाण्डेय

तुम्हें मन की बातें बताने का मन है 
अकेले में सुनने सुनाने का मन है 

तेरे साथ हँसने हँसाने का मन है 
तुम्हें छेड़ने का सताने का मन है 

तू आ मेरे होठों पर मुस्कान बन कर 
तुम्हें प्यार से गुनगुनाने का मन है 

समंदर को तैर आया हूँ लेकिन 
तेरी आँख में डूब जाने का मन है 

मेरी इन दिनों है मेरे दिल से अनबन 
तुम्हें साथ लेकर मानाने का मन है 

तेरी याद को अपने दिल में बसाकर 
हरेक याद को भूल जाने का मन है 

ज़माने ने दी है बहुत चोट लेकिन 
किसी फूल से चोट खाने का मन है