बुधवार, 26 अगस्त 2015

Album -Jaga Mahadev by Dr.Mukesh Pandey

Singer - Divesh Singh Kundan
 
Album - Jaga Mahadev


Lyrics - Dr.  Mukesh Pandey

चाँद छत पर ऊगल बा पड़ोसी के - डॉ मुकेश पाण्डेय

बात सगरो चलल     मदहोशी के 
चाँद छत पर ऊगल बा पड़ोसी के 
देख के ना-समझ दिल मचल जाता ई 
हुद्बुदी होखे लागे गर्मजोशी के 

मस्ती लउके बनारस सा अंगड़ाई में 
ताज आगरा के झलकेला सुघराई में 
ई त  दवा भईल बा बेहोशी के 
चाँद छत पर ऊगल बा पड़ोसी के 

पागल मन होला पायल के संगीत से 
हार अच्छा लागे अब त हर जीत से 
हम केतना कहीं एह बे-वशी के 
चाँद छत पर ऊगल बा पड़ोसी के 

उनके चेहरा पर जियरा फ़िदा हो गईल 
कुछ समझ नाहीं पवनी ई का हो गईल 
होला हैरान मन सोची-सोची के 
चाँद छत पर ऊगल बा पड़ोसी के 

मीठी बतियन से मोती के झरना बहे 
आशिक़ दिल पे क़सम से क़यामत ढहे 
मुकेश'दिलवा दीवाना बा हंसी के 
चाँद छत पर ऊगल बा पड़ोसी के 












नया काँवर एल्बम जाग महादेव " गायक दिवेश सिंह 'कुंदन'


भोजपुरी का नया काँवर एल्बम जाग महादेव " गायक दिवेश सिंह 'कुंदन' के अन्य सभी एल्बम में काफ़ी मधुर व कर्ण-प्रिय बन पड़ा है। कारण है इस एल्बम में उनका स्वर शिल्प। बहुमुखी प्रतिभा के धनी इस गायक कलाकार ने अप्रतिम ऊर्जा से इस एल्बम में अपनी गायन क्षमता का बेजोड़ प्रदर्शन किया है।  चंदा कैसेट कम्पनी द्वारा प्रस्तुत इस एल्बम को  शिव भक्तों का अत्यंत प्यार मिला। जहाँ  इस एल्बम में संगीत तरुण तूफानी द्वारा  दिया गया है।  वहीं इस के गीत डॉ मुकेश पाण्डेय ने लिखा है। 





हम ना रहब ये पिया ,प्यार कईले बानी ममहर में - [भोजपुरी गीत ] डॉ मुकेश पाण्डेय

डोलिया हमार जहिया घर से चलल 
मेहँदी के रंग हमार उतरे लागल 
दिल चाहत नईखे रहीं तोहरा घर में 
हम ना रहब ये पिया ,प्यार कईले बानी ममहर में 

उनका के मनले रहीं हम जान   से 
सूती-उठी देखत रहीं बड़ी ध्यान से 
एके संघे पढ़त रहनी एके कवलेज में 
प्यार हम कईले बानी बड़ा कम एज में 
उहे बसल बाड़े हमार जिगर में 
हम ना रहब ये पिया ,प्यार कईले बानी ममहर में 


रोक जनि राह तू हम नाहिं रहब 
दिल के बात ख़ाली उनके से कहब 
सातो जनम के मनले बानी साथी 
उनके के पूजत रहबि दिन -राति 
उ त तड़पत होईहें दुःखवा के क़हर में 
हम ना रहब ये पिया ,प्यार कईले बानी ममहर में 


मानब नाहीं हम दुनिया के बात हो 
जिनगी हमार कटी उनके साथ हो 
हमपे यक़ीन कर साँच ह बतिया 
कईले बानी प्यार किरिया खाके आपन देंहिया 
मुकेश'रोवत होईहें अपना गांव नगर में 
हम ना रहब ये पिया ,प्यार कईले बानी ममहर में 



















भोजपुरी मुक्तक [3] डॉ मुकेश पाण्डेय

आइहो ! दादा ई     जिनगी हमार 
एगो    नाकामी    के    धारा   बा 
केहु के चाह में अबले जियल बानी 
अब भगवान जाने का सहारा बा 

भोजपुरी मुक्तक [२ ] डॉ मुकेश पाण्डेय

दउरिले ख्याल के पीछे 
लागे पागल हो गईल बानी 
हाय !बेहोशी में हम अबले 
तोहके आपन बुझत बानी 


प्रेम-फूल - डॉ मुकेश पाण्डेय

 फूल समझकर प्रेम को पाला 
पर काँटों की बन गयी माला 
चुभ रहे हैं अंग-अंग में दहक रही दिल दर्द की ज्वाला 


सुरुचि सुवास सरस शुचि सुन्दर 
अगणित गुण  हैं उसके अंदर 
अमृत समझा था मैं जिसको वह तो निकला विष का प्याला 

महामोह         में मरता 'मुकेश"
विरह-व्यथा कलियों का क्लेश 
सुख-पराग समझा था जिसको बना वहीँ दुःख का भाला 

ईश वंदना - डॉ मुकेश पाण्डेय

प्रभु धीर बने,हम वीर बनें संतान स्वदेश की सच्ची बनें 
नहीं क्रूर बनें  नहीं पापी बनें दुनिया में यशस्वी तपस्वी बनें 
सत धर्म परायण भक्त बनें  ,अभिमान विनाशक दास बनें 
गुणवान बनें ,बलवान बनें  प्रिय देश की शान महान बनें 
बन जाएँ सहायक दुःखियों के नित सेवक निर्बल के ही बनें 
नहीं स्वार्थी बनें परमार्थी बनें हम गांधी समान विरागी बनें 
आजाद सुपंथ-सुभाष बनें हर भांति जवाहरलाल बनें 


गुज़ारा किस तरह मौसम नज़ारे बोलते हैं - डॉ मुकेश पाण्डेय

गुज़ारा किस तरह मौसम नज़ारे बोलते हैं 
तुम्हारी आँख से टूटे सितारे बोलते हैं 

जिसे तुम छोड़ आये थे कहीं ठंढी रुतों में 
अभी उस राख़ के अंदर शरारे बोलते हैं 

ख़ामोशी से ये किसकी आस ले के जी रहे हो 
समंदर से समंदर के किनारे बोलते हैं 

कभी जब याद कोई आ के दामन थामती है 
किसी की आँख के क़ातिल इशारे बोलते हैं 

मुकेश"जाते कहाँ हो शीशा-ए-दिल अपना लेकर 
वहां पत्थर की भाषा लोग सारे बोलते है