मंगलवार, 18 अगस्त 2015
तुम प्यारे नबी के रोजे पे क़ुर्बान हो जइयो { नात शरीफ़ }- डॉ. मुकेश पाण्डेय
हज करके ऐ अल्लाह वालो जब मदीने में अईयो
तुम प्यारे नबी के रोजे पे क़ुर्बान हो जइयो
दीन दुनिया के हैं सहारे काबे और मदीने में
देखो ख़ुदा के ख़ास नज़ारे काबे और मदीने में
देखे हैं देखने वालों ने -रहमत के हसीं उजालों ने
तौहीद के मतवालों ने
ख़ुदा तुम्हे जब तक भी रखे उनके कदमो में रहियो
तुम प्यारे नबी के रोजे पे क़ुर्बान हो जइयो
दोनों जहाँ को बनाया ख़ुदा ने
प्यारे नबी के सदके में तुम्हे यहाँ पहुँचाया
ख़ुदा ने प्यारे नबी के सदके में
रंगीन फ़िज़ाएं कहती हैं-जन्नत की हवाएँ कहती हैं
शर्मीली हवाएँ कहती हैं
जो है मुसलमानो की हालत कमली वाले से कहियो
तुम जब जाओगे वहीं कोनैन को दौलत में पाओगे
ख़ौफ़ ख़ुदा से रोते हुवे जब सिजदे में तुम पाओगे
यह जलवा रंग लाएगा -रहमत को प्यार आएगा
अल्लाह करम फरमाएगा
क़ाबा से ईमान के जलवे अपने सीने में लइयो
तुम प्यारे नबी के रोजे पे क़ुर्बान हो जइयो
पतईया प जय मइया लिखवइति {भोजपुरी देवी गीत }- डॉ. मुकेश पाण्डेय
नीम बन जईति ना कि मन करे नीम बन जईति ना
पतईया प जय मइया लिखवइति
कि मन करे नीम बन जईति ना
एतना छाया करीतीं माई के लागित नाही धूप जी
तनी कुम्हिलाइत नाहीं मईया के रूप जी
झुलुआ लगइति ना ,रेशम के डोरी बन्हवइति ना
कि रसे-रसे झुलुआ झूलइति ना
कि मन करे नीम बन जईति ना
कहतीँ त लवंग पानी ले आइत मलिनिया
लागीत दरबार रोज़ो फूटते किरिनियाँ
बाभना बोलइति ना ,कि शुभ-शुभ शंख फूंकवइति ना
कचहरी भोरहीं से लगवइति
कि मन करे नीम बन जईति ना
पाण्डेय मुकेश" से पचरा लिखवइति
दुधवा से माई राउर चरण धोवइति
कलशा धरइति ना ,मईया के जलशा करइति ना
कि पचरा मन भर खूब गवइति ना
कि मन करे नीम बन जईति ना
निर्माता -निर्देशक शील शिंघल द्वारा बनायीं गयी फिल्म "झूठा ये प्यार है "
अब बुझ जईब सेजे प सईयां, गर के हाला ले अईल ना{लोकगीत } - डॉ. मुकेश पाण्डेय
जब- जब गईल विदेश बलमुअा मंगनी बाला ले अईल ना
अब बुझ जईब सेजे प सईयां, गर के हाला ले अईल ना
एक बेरी गईल त हांफ़त अईल, सबुर क के महटिआ गईनी
भोली सुरतिया प सारा गिला गम, शिक़वा शिक़ायत भुला गईनी
तबकी गईल त कुछ ना ले अईल ,रुसनी पिया मना लिहल
मानी ना मन अब पटी ना एक क्षन, छछने जीव छछना दिहल
जाड़ा के बेरिया सिउटर ना मफलर, साला दोसाला ले अईल ना
अब बुझ जईब सेजे प सईयां, गर के हाला ले अईल ना
अईब पलंग पर मन में उमंग भरी, मुँहवा फेरबी पलट जाईब
लहि ना लव छव छुवे ना देब देंह ,पलंग के पाटी तर सट जाइब
चाहे लुभइब रीझईब मनइब, पट गोड़तारी ओरि हट जाईब
ढेर कुरुरईब त ढेर पछितईब, ननद के खाटी पर उलट जाइब
छूछी ना पायल ना झुमका ना कँगना, मोती के माला ले अईल ना
अब बुझ जईब सेजे प सईयां, गर के हाला ले अईल ना
गईल बंगाल माँगटीका मंगलसुत, छाड़ा कमरबंद ना आईल
सोना के चैन टप बॉम्बे के मेकअप, साबुन सुगंध गंध ना आईल
आगरा के जूती बनारस के कुर्ती, गोटा जड़ल साड़ी भूली गईल
बॉम्बे से लहंगा चोली ना महंगा, झोरी धरवल त भूली गईल
छूछे बा ओठ गाल, पाके ना बढ़े, तेल केश काला ले अईल ना
अब बुझ जईब सेजे प सईयां, गर के हाला ले अईल ना
सुन के आज परदेसी तहार देश बोलावत बा - डॉ. मुकेश पाण्डेय
अपना वतन के माटी संदेश भेजावत बा
सुन के आज परदेसी तहार देश बोलावत बा
पीपल के छैयाँ पनघट नदिया तट निशदिन राह निहारे
दिन में सूरज पल-पल खोजे रात में ढूंढे चाँद सितारे
सूरत कबो न बिसरे हरमेश रोवावत बा
सुन के आज परदेसी तहार देश बोलावत बा
रात दिवाली की काली तहरा बिन सुना लागे होली
पिचकारी के रंग अंग पर लागे जइसे गोली
पावन पर्व दशहरा लंकेश मानवत बा
सुन के आज परदेसी तहार देश बोलावत बा
मदद करे खातिर हद में सरहद रस्ता ताकत बा रोजे
दूध के क़र्ज़ चुकावे ख़ातिर मातृभूमि तोहरा के खोजे
गीता के कृष्ण मुकेश" उपदेश सुनावत बा
सुन के आज परदेसी तहार देश बोलावत बा
मैं जिसे ढूँढ़ता था मुझे मिल गयी - डॉ. मुकेश पाण्डेय
उसको देखा तो दिल की कली खिल गयी
मैं जिसे ढूँढ़ता था मुझे मिल गयी
वो जो कल तक नज़र के उजालों में थी
मेरे ख्वाबों में थी और ख़्यालों में थी
मेरी हर एक तमन्ना के दामन में थी
मेरी सांसों में थी दिल के धड़कन में थी
आज वो प्यार के एक हसीं मोड़ पर
मुझसे टकरा गयी -मेरे पास आ गयी
पास आई तो दिल की कली खिल गयी
मैं जिसे ढूँढ़ता था मुझे मिल गयी
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| Dr.Mukesh Pandey |
मैंने गीतों में अपने सजाया जिसे
और ग़ज़ल की तरह गुनगुनाया जिसे
वो मेरी सोच में रंग भरती रही
रूह मेरी उसे याद करती रही
आज पहली मुलाक़ात में इस तरह
उसने डाली नज़र ऐसे देखा इधर
हर तरफ़ प्यार की चांदनी खिल गयी
मैं जिसे ढूँढ़ता था मुझे मिल गयी
क्यों न मैं आज से उसको अपना कहूँ
जागते में जो देखा वो सपना कहूँ
हीर की तरह जो मुझसे टकराई है
मुझको राँझा समझकर क़रीब आई है
आख़िर उसने मुझे ये बता ही दिया
उसका सपना हूँ मैं- उसका अपना हूँ मैं
आज दोनों के दिल की कली खिल गयी
मैं जिसे ढूँढ़ता था मुझे मिल गयी
चांदनी घुल गयी है हंसी रूप में
या खड़ी है कोई जलपरी धूप में
वो जो मुस्काये सावन की बरसात में
आग लग जाये भींगी हुई रात में
दिल ये कहता है जलवों में खो जाऊं मैं
उसके बाँहों के झूलों में सो जाऊं मैं
ये जो सोचा तो दिल की कली खिल गयी
मैं जिसे ढूँढ़ता था मुझे मिल गयी
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