बुधवार, 9 सितंबर 2015

कवन गुज़री दिही रे,भतार तोहके पईंचा - डॉ. मुकेश पाण्डेय

रुपिया पईसा मंगबु भउजी केहु दे दी पईंचा 
कवन गुज़री दिही रे,भतार तोहके पईंचा 

ई कवन लुफत सिखले रे सतभतरी 
छुईयो के ना लाज ह्या बाटे कवनो गतरी 
कुल इज्ज़त के बुझेले बाड़े गज़रा मुरई ढईंचा 
कवन गुज़री दिही रे,भतार तोहके पईंचा 

कहले त कहले दोसरा से जनि कहिहे 
नाहीं त लात-मुक्का दोसरा से सहीहे 
खईहे ते मुअड़ी के मार हईंचा -हईंचा 
कवन गुज़री दिही रे,भतार तोहके पईंचा 


एही ख़ातिर भेजले भतार का तें बहरा 
पाण्डेय मुकेश " से लगाइब तोहपे पहरा 
लागे नाही देहब अपना मरद संघ गवईंचा
कवन गुज़री दिही रे,भतार तोहके पईंचा 
 


बाटे दरदिया बालपन से ,हाय रे मोरी कमरिया में - डॉ. मुकेश पाण्डेय

हाय रे मोरी कमरिया में हाय रे मोरी कमरिया में 
बाटे दरदिया बालपन से ,हाय रे मोरी कमरिया में 
अबहीं ले टीसता ई चढ़ली उमरीआ में 
बाटे दरदिया बालपन से ,हाय रे मोरी कमरिया में 

लुकाछिपी खेलत रहनी हम त लरिकाईं में 
दोल्हापाती खेलत रहनी आम अमराई में 
झूला हम त झूलत रहनी बांस बँसवरिया में 
बाटे दरदिया बालपन से ,हाय रे मोरी कमरिया में 

डुबकी लगावत रहनी लईकन के छकावत रहनी 
केहु के ना हाथ में अइनी लोला हम देखावत रहनी 
गाछी प से कूदत रहनी बाबा के पोखरिया में 
बाटे दरदिया बालपन से ,हाय रे मोरी कमरिया में 

अचके में अईले एकदिन गवना के डोली 
चंचल चिरईया के बंद भईल बोली 
कईसे बताईं अपना मुकेश"सँवरिया से 
बाटे दरदिया बालपन से ,हाय रे मोरी कमरिया में 

मातु, तहरा चरण में हम भेंट तुच्छ-सा लईंनी हो - डॉ. मुकेश पाण्डेय

जवन सबकर पीड़ा कह पावे 
हर मन के वीणा बन पावे 
अईसन कवनो गीत हम अबले लिखे नाही पवनी हो 
मातु, तहरा चरण में हम भेंट तुच्छ-सा लईंनी हो 
सिर्फ कईनी कागद कारे 
बिन मतलब के शब्द उचारे 
एह शब्दन में भाव नईखे छंद नईखे 
एइमे घाहिल मानवता के द्वन्द नईखे 
बस तिक्त - रिक्त ही आख़र लिख पईनी हो 
मातु, तहरा चरण में हम भेंट तुच्छ-सा लईंनी हो 
तोहरा दुआरी कोटि-कोटि साधक अईलें 
आपन आपन भेंट सुर नानक लइलें 
मीरा अस कबीरा जस तहरे साधक बा 
ढ़ाई आखर में सब कहे के बाधक बा 
सोच सोच के हम बेहद घबरइनि हो 
मातु, तहरा चरण में हम भेंट तुच्छ-सा लईंनी हो 
माना हमरा वाणी में उ शक्ति नईखे 
हमरा शब्दन में तनिको भक्ति नईखे 
अउर भाग्य भी हमरो किंचित नईखे बड़ा 
पंगु गहन गिरिवर पर अब तक नाही चढ़ा 
पर जवन होवे लाचार उहे शिशु माई के दुलार पावेला 
ईहे सोच के मातु तहरा दुअरा प हम अइनी हो 
मातु, तहरा चरण में हम भेंट तुच्छ-सा लईंनी हो