बुधवार, 26 अगस्त 2015

हम ना रहब ये पिया ,प्यार कईले बानी ममहर में - [भोजपुरी गीत ] डॉ मुकेश पाण्डेय

डोलिया हमार जहिया घर से चलल 
मेहँदी के रंग हमार उतरे लागल 
दिल चाहत नईखे रहीं तोहरा घर में 
हम ना रहब ये पिया ,प्यार कईले बानी ममहर में 

उनका के मनले रहीं हम जान   से 
सूती-उठी देखत रहीं बड़ी ध्यान से 
एके संघे पढ़त रहनी एके कवलेज में 
प्यार हम कईले बानी बड़ा कम एज में 
उहे बसल बाड़े हमार जिगर में 
हम ना रहब ये पिया ,प्यार कईले बानी ममहर में 


रोक जनि राह तू हम नाहिं रहब 
दिल के बात ख़ाली उनके से कहब 
सातो जनम के मनले बानी साथी 
उनके के पूजत रहबि दिन -राति 
उ त तड़पत होईहें दुःखवा के क़हर में 
हम ना रहब ये पिया ,प्यार कईले बानी ममहर में 


मानब नाहीं हम दुनिया के बात हो 
जिनगी हमार कटी उनके साथ हो 
हमपे यक़ीन कर साँच ह बतिया 
कईले बानी प्यार किरिया खाके आपन देंहिया 
मुकेश'रोवत होईहें अपना गांव नगर में 
हम ना रहब ये पिया ,प्यार कईले बानी ममहर में 



















कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें