बुझे दीयों के नाम हो गए
उजियाले बदनाम हो गए
चिड़ियों की नन्ही चोंचों पर
चोरी के इलज़ाम हो गए
होती है जो भी बातें शबाब में वो अब बात नहीं
भींगा ये खेत है ओस से सारा अब बरसात नहीं
प्यार किसी से क्यों होता है
दिल जो गया तो क्यों रोता है
जिसे ढालूँ ग़ज़ल में वो ज़ज़्बात अब नहीं
जिस्म के साथ रूह की यारा सौग़ात अब नहीं
ढाई आख़र पढ़ा न कोई
सौ-सौ पूर्ण विराम हो गए
हँसना हंसाना ये दिल फ़रेबी अब खुराफ़ात नहीं
दुनिया में जो भी सांसे मिली है वो ख़ैरात नहीं
रंग यूँ भी बदलते देखे हैं
मैंने पत्थर पिघलते देखे हैं
ये हक़ीकत है या दिल को बहला रहा है
मैंने सुना है ज़मी पर ख़ुदा आ रहा है
किसके आगे हाथ पसारें
ईश्वर तक कंगाल हो गए