शनिवार, 22 अगस्त 2015

JHOOTHA YE PYAR HAI FULL MOVIE -Lyrics : Dr.Mukesh Pandey




             Starring : Sheel Singhal ,Shivi Gupta,Sandhya Singhal , vinod panchal, ashok kr roy, madhu sexena, poonam mishra, Kshitij Singhal ,Kavya Singhal 
Director : Sheel Singhal 
Producer : Sheel Singhal
Writer : Prairna Agarwal
Music :  Tarun Toofani
Lyrics : Dr.Mukesh Pandey 
Singers : Vikas Narayan Jha,Shakshi 
Camra : Jitendra Singh
Lable : Sheel Singhal Pictures 
Banner: Sheel Singhal Pictures
Edit:Sanjeev Sachdev/ Pradeep Kumar

JANA GANA MANA | NATIONAL ANTHEM | OFFICIAL FULL VIDEO HD 2015

                                                        +Times Music 

GURU PURNIMA COLLECTION


Guru Purnima Collectionhttp://www.saavn.com/s/album/hindi/Guru-Purnima-Collection-2015/ujtr5To6xzc_


ALBUM :GURU PURNIMA COLLECTION
LYRICS : DR.MUKESH PANDEY
SINGER : ANUP JALOTA ,DIWAKAR DIWEDI , SHILPA PAI
LABLE : NUPUR 

एल्बम : गुरु पूर्णिमा कलेक्सन 
गीतकार : डॉ मुकेश पाण्डेय 
स्वर : अनूप जलोटा ,दिवाकर दिवेदी ,शिल्पा पाई 
संगीत कम्प्नी : नुपुर ऑडियो 

Guru Purnima Collection


Guru Purnima Collection


हरी नाम का प्याला हरे कृष्ण की हाला - डॉ. मुकेश पाण्डेय


हरी नाम का प्याला हरे कृष्ण की हाला
ऐसी हाला पी पी करके, चला चले मतवाला

राधा जैसी बाला और वृन्दावन का ग्वाला
ऐसा ग्वाला मुरली मनोहर जपो कृष्ण की माला

हरी नाम का प्याला हरे कृष्ण ……….

हरे कृष्ण का जप हो और हरे कृष्ण की माला
देव ज्योती से ह्रदय शुद्ध हो, नीकले मन की ज्वाला
हरी नाम का प्याला हरे कृष्ण ……….

कृष्ण की धुन में  तन हो, और हरे कृष्ण में  मन हो
ऐसे तन मन के मन्दिर में , कृष्ण डाले हाला
हरी नाम का प्याला हरे कृष्ण ……….

हरेकृष्ण में  बल हैं, कृष्ण जल और थल है
ऐसे जल थल नभ से पी लो, नारायण की हाला
हरी नाम का प्याला हरे कृष्ण ……….


गायक : अनूप जलोटा 
गीत : डॉ मुकेश पाण्डेय 

Koi Kahe Govind (From "Bhajans By Anup Jalota") Lyrics : Dr.Mukesh Pandey

http://www.saavn.com/s/song/hindi/Masterpiece-Bhajans/Koi-Kahe-Govind-From-Bhajans-By-Anup-Jalota/OTk0fRVhT2Q


Song :      Koi Kahe Govind
Album :

                Masterpiece Bhajans 

Singer : Anup Jalota 
Lyrics : Dr.Mukesh Pandey 
Lable : Shamaroo Entertainment /Nupur Audio
Released Aug 11, 2014
Released Aug 11, 2014
Released Aug 11, 2014


गीत :कोई कहे गोविन्द 
गायक : अनूप जलोटा 
गीतकार : डॉ.मुकेश पाण्डेय 




साईं भजन बाई अनूप जलोटा



sai bhajan by anup jalota 
Singer & Music : Anup Jalota 
Lyrics : Dr.Mukesh Pandey  & Anup Jalota 
 
साईं भजन बाई अनूप जलोटा 
   स्वर व संगीत : अनूप जलोटा 
गीत : डॉ मुकेश पाण्डेय व  अनूप जलोटा 

ऐसी दीवानी हुई मैं राधा, मनमोहन मनभावन की - डॉ. मुकेश पाण्डेय

सोना सोना -सोना सोना ,तेरा रूप है सलोना 
         जैसे छाई घटा हो सावन की 
ऐसी दीवानी हुई मैं राधा,  मनमोहन मनभावन की 

तू ही गवईया है तू ही बजईया,     अधरों पे तेरी ये वंशी 
जाऊं जिधर मुझे खिंच ही लाये बस में बसईया ये वंशी 
तू है दीनदयाल, नन्दलाल तू गोपाल 
तुझे रहती है सुध बृजबालन की 
ऐसी दीवानी हुई मैं राधा,  मनमोहन मनभावन की 

तेरे ही रंग में रंगी हूँ मैं गिरधर ,छोड़ दिया जग सारा 
तेरे ही प्यार में जोगन बनी  हूँ लेके ये मन इकतारा 
पाण्डुरंग -पाण्डुरंग तू मुरारी मुकुंद 
मुझे तेरी चाहत तुझे माखन की 
ऐसी दीवानी हुई मैं राधा,  मनमोहन मनभावन की 

दिल हो मेरा ये कदम्ब की डाली,  मुरली बजे तेरी इसमें 
या फ़िर ये बन जाये दर्पण सरीखा, सूरत सजे तेरी इसमें 
चाहे शेष या विशेष ,हो दिवेश" या मुकेश"
सभी मांगे धूलि तेरे चरणन की 
ऐसी दीवानी हुई मैं राधा,  मनमोहन मनभावन की 


तू झूम झूम के साक़ी मचल मचल के पिला - डॉ. मुकेश पाण्डेय

तू झूम झूम के साक़ी  मचल मचल के पिला 
शराब फिर मुझे सागर बदल बदल के पिला 

शराबखाने में हंगामा क्या ज़रूरी है 
सम्हल सम्हल के पिए हम सम्हल सम्हल के पिला 

बसंती धूप में जैसे की वर्फ़ पिघले है 
नशे के आँच में तू भी पिघल पिघल के पिला 

ये तेरा रिन्द बड़ी मुद्द्तों से प्यासा है 
हदे शराब से आगे निकल निकल के पिला 

वाया पाण्डेयपुर चौराहा {फोटो }

डॉ मुकेश पाण्डेय

INDYA RECORDS PRESENTS
ALBUM: VAYA PANDEYPUR CHAURAHA
MUSIC & LYRICS : DR. MUKESH PANDEY

माँ का लिहाज़ बाप की इज़्ज़त नहीं रही - डॉ. मुकेश पाण्डेय

माँ का लिहाज़ बाप की इज़्ज़त नहीं रही 
बच्चों में बात सुनने की आदत नहीं रही 

मिलने न आये ख़त न लिखे फोन तो करे 
क्या उसके पास इतनी भी फ़ुरसत नहीं रही 

है मालिकों के पास खज़ाने भरे हुवे 
मेहनतकशों के वास्ते उज़रत नहीं रही 

ये कैसी चांदनी है कहीं दिलकशी नहीं 
ये कैसी धूप है कोई शिद्द्त नहीं रही 

पंडित हो मौलवी हो गवर्नर हो या वजीर 
इस दौर में किसी की भी वक़्वत नहीं रही 

बच्चों के बच्चे जब से बड़े हो गए मुकेश"
मेरे ही घर में मेरी ज़रूरत नहीं रही 

बिछड़ की फिर तुझे तेरी ख़बर न आये कभी - डॉ. मुकेश पाण्डेय

बिछड़ की फिर तुझे तेरी ख़बर न आये कभी 
मैं इंतज़ार करूँ और सहर न आये कभी 

हजार चाहूँ मगर मैं तुझे भुला न सकूँ 
ख़ुदा  करे की मुझे ये हुनर न आये कभी 

ये सोचता हूँ कि क्यों तेरे रु-ब-रु होकर 
मेरा वुजूद मुझे भी नज़र न आये कभी 

बरहना-सर जहाँ फिरती है आरजू मेरी 
तेरे नसीब में वो दोपहर न आये कभी 

विसाल कुछ भी नहीं मर्गे-आरज़ू के सिवा 
मेरे दुआ में इलाही असर न आये कभी 

किसी ने देखी भी है मंजिलें-जुनूँ अब तक 
जो तुझको ढूंढ़ने निकले वो घर न आये कभी 

जो दोस्त मिला है तुझको ही पूछता है मुकेश "
नज़र में फिर तेरा नक्शा उतर न आये कभी  

हसीन ख्वाबों में - डॉ. मुकेश पाण्डेय

तुझे मैं अपना नहीं सकता 
मगर इतना भी क्या कम है 
कि कुछ मुद्दत 
हसीन ख्वाबों में रहकर 
जी लिया मैंने 

मेरे गांव में- डॉ. मुकेश पाण्डेय

आज मसीहा नहीं है 
पहुंचे जो मेरे गांव में 
नफरत की आँधी 
उड़ा रही 
स्तम्भों को मेरे गांव में 
रिश्तों का कोई मेल नहीं 
अपना अपनों से कतराता 
देखो मेरे गांव में 
आठ लोग 
चूल्हे चार 
इक बस्ती सरहदें हजार 
मध्य आँगन में 
उठ जाती है 
दीवारें मेरे गांव में 
दादी जब मसले कहती है 
खेतों की फसलें रोती  हैं
डाल कोई ले जाता है 
जड़ को कोई खोदे 
बाग़ बग़ीचे तक रोते  हैं  
बेबस मेरे गांव में।  











हम जेकरा ख़ातिर जरत रहनी दिया लेखा - {भोजपुरी ग़ज़ल }- डॉ. मुकेश पाण्डेय

हम जेकरा ख़ातिर जरत रहनी दिया लेखा 
उ हमके छोड़ गईल बाटे हाशिया लेखा 

सजा के पलकन पर अपना नुमाइशी आंसू 
उठाके घुमतानी हम ताज़िया लेखा 

हमार उनका से रिश्ता बहुत क़रीबी बा 
हम उनका देह से वाकिफ़ बानी तौलिया लेखा 

अदब के शहर में कालीन के ज़माना बा 
पड़ल बानी हम ग़ालिब के बोरिया लेखा 

कोयल बोले भा गौरैया अच्छा लागेला - {भोजपुरी ग़ज़ल }- डॉ. मुकेश पाण्डेय

कोयल बोले भा गौरैया अच्छा लागेला 
अपना गावं में सब कुछ भैया अच्छा लागेला 

तहरा आगे माई मौसी जईसन लागेले 
तहरा गोद  में गंगा मईया अच्छा लागेला 

कउवा के आवाज़ भी चिट्ठी जईसन लागे 
गाछ पर बईठल एक गवईया अच्छा लागेला 

माया मोह बुढ़ापा में ढेर बढ़ जाला 
लइकाई में एक रुपइया अच्छा लागेला 

खुदे डांटस खुदे लगावस छाती से 
प्यार में उनकर ई रवैया अच्छा लागेला 




सजन हम भूल गईनी ई बात - {भोजपुरी गीत }- डॉ. मुकेश पाण्डेय

तू अम्बर के आँख के तारा , हमरो छोट बा हाथ
सजन  हम भूल गईनी ई बात 

तोहके सारा मन से चहनी ,चहनी  सारा तन से 
अपना पूरा पन  से चहनी ,अउर अधूरा पन  से 
पानी के एक बूँद कहाँ ,कहाँ भरल बरसात 
सजन  हम भूल गईनी ई बात 

जनम-जनम हम माँगेब तोहके,तू हमके ठुकरइह
हम माटी में मिल जाईब त,      तू माटी हो जइह 
लहर के आगे का बाटे छोट तिनका के अवक़ात 
सजन  हम भूल गईनी ई बात देखनी हम 

तहरे ओरी  देखनी हम ,      ना अपना ओर देखा 
जब जब बढ़े चहनी पांव से लिपटल लछुमन रेखा 
हमहू अपना साथ ना रहनी ,दुनियाँ तहरा साथ 
सजन  हम भूल गईनी ई बात