हे गिरधारी ,बाँके बिहारी करो दुखियों का उद्धार
करो भव सिंधु से पार - करो भव सिंधु से पार
पांचाली ने जब था पुकारा , लाज बचाने आए थे
दुर्योधन के छोड़ के घर को ,साग विदुर घर खाए थे
उसी तरह का हमपर भी तो, नाथ करो उपकार
करो भव सिंधु से पार - करो भव सिंधु से पार