शनिवार, 19 सितंबर 2015

प्यार के ईहे त ,ह पहिला शुरुआत - डॉ मुकेश पाण्डेय

नैना लड़ी दुनो दिलवा के हो जाई मुलाक़ात 
प्यार के ईहे त ,ह पहिला शुरुआत 

प्रीत के अगिया जब-जब दहकी 
तब-तब मनवा अपने से बहकी 
प्यार के गीत दिल तब गुनगुनाई 
दिल के मौसम फेर बहुते सोहाई 
केहु ना जाने सबका सोझा अँखिया करे लागी बात 
प्यार के ईहे त ,ह पहिला शुरुआत 

मन में पहिले त आस भर जाई 
फेर तनी सा विस्वास भर जाई 
देंहिया सिहरी ना आई ऊँघाई 
प्रीतम के देखि दिल फूले ना समाई 
चुपे चोरी फेर मिले ख़ातिर खोजी अन्हरिया रात 
प्यार के ईहे त ,ह पहिला शुरुआत 

सब एगो मधुर सपन होई जाई 
भावना भी सुमन होई जाई 
प्यार ना देखी तब गोर बाउर चिकन 
मन मंदिर में जे बसे उ निमन 
ई ह आज़ाद पंक्षी मुकेश " एकर ना कवनो जात 
प्यार के ईहे त ,ह पहिला शुरुआत 















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