शदियो ना कईलस रे दादा ,मोहब्बत में सब हो गईल
हद से उ बढ़ गईल ज्यादा ,मोहब्बत में सब हो गईल
असरा प हमहू शरीरिया सउंपनी
रतिया बिरात हम संघे संघे घुमनि
जननी ना बदली इरादा ,मोहब्बत में सब हो गईल
हद से उ बढ़ गईल ज्यादा ,मोहब्बत में सब हो गईल
अमवा पर ठोर मारी उड़ गईल सुग्गा
अब त लुटाता मोर सगरी लुग्गा
नर बिना तड़पेला मादा ,मोहब्बत में सब हो गईल
हद से उ बढ़ गईल ज्यादा ,मोहब्बत में सब हो गईल
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