शुक्रवार, 21 अगस्त 2015

हद से उ बढ़ गईल ज्यादा ,मोहब्बत में सब हो गईल -डॉ. मुकेश पाण्डेय

शदियो  ना कईलस रे  दादा ,मोहब्बत में सब हो गईल 
हद से उ बढ़ गईल ज्यादा ,मोहब्बत में सब हो गईल 

असरा  प हमहू शरीरिया सउंपनी 
रतिया बिरात हम संघे संघे घुमनि 
जननी ना बदली इरादा ,मोहब्बत में सब हो गईल 
हद से उ बढ़ गईल ज्यादा ,मोहब्बत में सब हो गईल 

अमवा पर ठोर मारी उड़ गईल सुग्गा 
अब त लुटाता मोर सगरी लुग्गा 
नर बिना तड़पेला मादा ,मोहब्बत में सब हो गईल 
हद से उ बढ़ गईल ज्यादा ,मोहब्बत में सब हो गईल 


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