तू अम्बर के आँख के तारा , हमरो छोट बा हाथ
सजन हम भूल गईनी ई बात
तोहके सारा मन से चहनी ,चहनी सारा तन से
अपना पूरा पन से चहनी ,अउर अधूरा पन से
पानी के एक बूँद कहाँ ,कहाँ भरल बरसात
सजन हम भूल गईनी ई बात
जनम-जनम हम माँगेब तोहके,तू हमके ठुकरइह
हम माटी में मिल जाईब त, तू माटी हो जइह
लहर के आगे का बाटे छोट तिनका के अवक़ात
सजन हम भूल गईनी ई बात देखनी हम
तहरे ओरी देखनी हम , ना अपना ओर देखा
जब जब बढ़े चहनी पांव से लिपटल लछुमन रेखा
हमहू अपना साथ ना रहनी ,दुनियाँ तहरा साथ
सजन हम भूल गईनी ई बात
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