बुधवार, 9 सितंबर 2015

बाटे दरदिया बालपन से ,हाय रे मोरी कमरिया में - डॉ. मुकेश पाण्डेय

हाय रे मोरी कमरिया में हाय रे मोरी कमरिया में 
बाटे दरदिया बालपन से ,हाय रे मोरी कमरिया में 
अबहीं ले टीसता ई चढ़ली उमरीआ में 
बाटे दरदिया बालपन से ,हाय रे मोरी कमरिया में 

लुकाछिपी खेलत रहनी हम त लरिकाईं में 
दोल्हापाती खेलत रहनी आम अमराई में 
झूला हम त झूलत रहनी बांस बँसवरिया में 
बाटे दरदिया बालपन से ,हाय रे मोरी कमरिया में 

डुबकी लगावत रहनी लईकन के छकावत रहनी 
केहु के ना हाथ में अइनी लोला हम देखावत रहनी 
गाछी प से कूदत रहनी बाबा के पोखरिया में 
बाटे दरदिया बालपन से ,हाय रे मोरी कमरिया में 

अचके में अईले एकदिन गवना के डोली 
चंचल चिरईया के बंद भईल बोली 
कईसे बताईं अपना मुकेश"सँवरिया से 
बाटे दरदिया बालपन से ,हाय रे मोरी कमरिया में 

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