बुधवार, 9 सितंबर 2015

मातु, तहरा चरण में हम भेंट तुच्छ-सा लईंनी हो - डॉ. मुकेश पाण्डेय

जवन सबकर पीड़ा कह पावे 
हर मन के वीणा बन पावे 
अईसन कवनो गीत हम अबले लिखे नाही पवनी हो 
मातु, तहरा चरण में हम भेंट तुच्छ-सा लईंनी हो 
सिर्फ कईनी कागद कारे 
बिन मतलब के शब्द उचारे 
एह शब्दन में भाव नईखे छंद नईखे 
एइमे घाहिल मानवता के द्वन्द नईखे 
बस तिक्त - रिक्त ही आख़र लिख पईनी हो 
मातु, तहरा चरण में हम भेंट तुच्छ-सा लईंनी हो 
तोहरा दुआरी कोटि-कोटि साधक अईलें 
आपन आपन भेंट सुर नानक लइलें 
मीरा अस कबीरा जस तहरे साधक बा 
ढ़ाई आखर में सब कहे के बाधक बा 
सोच सोच के हम बेहद घबरइनि हो 
मातु, तहरा चरण में हम भेंट तुच्छ-सा लईंनी हो 
माना हमरा वाणी में उ शक्ति नईखे 
हमरा शब्दन में तनिको भक्ति नईखे 
अउर भाग्य भी हमरो किंचित नईखे बड़ा 
पंगु गहन गिरिवर पर अब तक नाही चढ़ा 
पर जवन होवे लाचार उहे शिशु माई के दुलार पावेला 
ईहे सोच के मातु तहरा दुअरा प हम अइनी हो 
मातु, तहरा चरण में हम भेंट तुच्छ-सा लईंनी हो 

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