गुरुवार, 17 सितंबर 2015

जवन चाहतारे तेहूँ कर जो रे - भोजपुरी लोकगीत - डॉ मुकेश पाण्डेय

जवन चाहतारे तेहूँ कर जो रे 
ना त डूबी धँसी कहीं मर जो रे 
रुपिया पईसा मँगबे भउजी केहु दे दी पईंचा 
कवन गुजरी दिही रे भतार तोहके पईंचा 

ई कवन लुफत सिखले रे सतभतरी 
छुईयो के लाज ना हाया बाटे कवनो गतरी 
कुल के इज़्ज़त बुझतारे गजरा मुरई ढईंचा 

कहले त कहले दोसरा से जनि कहिहे 
ना त लात मुक्का दोसरा से तेहीं सहीहे 
खईहे ते मुअड़ी के मार हईंचा -हईंचा 

एही ख़ातिर  भेजले भतार का तें बहरा 
तोहपे 'पाण्डेय मुकेश 'से लगवाईब पहरा 
उहे तोर हरिहर रखिहें बाग़ आ बगइचा 

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