रविवार, 6 सितंबर 2015

तेरे इश्क़ ने मुझको शोणिए पागल कर डाला - डॉ. मुकेश पाण्डेय

तेरे इश्क़ ने मुझको शोणिए पागल कर डाला 
तेरे  हुस्न से ख़ुश्बू बरसे आँखे मधुशाला 
हुस्न की रानी ,रूप की मल्लिका मैं हूँ तेरा मतवाला 

दिल नईयो मणदा एनु लाख मनावा 
मस्तानी चाल पे तेरी मर मर जांवा 
देख के तेरा रूप सलोना जागी बदन में ज्वाला 

ओ मेरी जिंदणी तू माणे न माणे 
मैं तुझको कितना चाहूँ अल्लाह जाणे 
साँझ सवेरे जपता हूँ मैं तेरे नाम की माला 



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