आईं आईं आईं सईयां जी जल्दी से घरवा आईं
कि जाड़ा जाला ना ओढ़ला से रजाई
मनवा ना लागे हमार खटिया पर
जागल रहिले हम रतिया भर
कवन ई दे तानी हमरा के साजा
हो जाता सब किरकिरा ई माजा
केकरा से दिल के कहीं हम बतिया,केकरा से बतिआईं
कि जाड़ा जाला ना ओढ़ला से रजाई
ई कवनो चाल ना हवे हो प्यार में
आधा बीतल जाड़ बा इन्तिज़ार में
भईल बा सब जगे ईहे रे हाला
गेहूं के संगे संगे घुनों पिसाला
माटी के तन पर गुमान बाटे काथी के अतने रउरा बताईं
कि जाड़ा जाला ना ओढ़ला से रजाई
पहिले तू कहि देत ना अईब घरे
हमहुँ त रह जइतीं राजा नइहरे
बहरी रहब जे अईब अंदर
सब प्यार हो जाई राजा छू-मंतर
अईब ना जदी त मिली ना नदी प्यासे मन रही जाई
कि जाड़ा जाला ना ओढ़ला से रजाई
कि जाड़ा जाला ना ओढ़ला से रजाई
मनवा ना लागे हमार खटिया पर
जागल रहिले हम रतिया भर
कवन ई दे तानी हमरा के साजा
हो जाता सब किरकिरा ई माजा
केकरा से दिल के कहीं हम बतिया,केकरा से बतिआईं
कि जाड़ा जाला ना ओढ़ला से रजाई
ई कवनो चाल ना हवे हो प्यार में
आधा बीतल जाड़ बा इन्तिज़ार में
भईल बा सब जगे ईहे रे हाला
गेहूं के संगे संगे घुनों पिसाला
माटी के तन पर गुमान बाटे काथी के अतने रउरा बताईं
कि जाड़ा जाला ना ओढ़ला से रजाई
पहिले तू कहि देत ना अईब घरे
हमहुँ त रह जइतीं राजा नइहरे
बहरी रहब जे अईब अंदर
सब प्यार हो जाई राजा छू-मंतर
अईब ना जदी त मिली ना नदी प्यासे मन रही जाई
कि जाड़ा जाला ना ओढ़ला से रजाई
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