हमरा के छोड़ी जदी बहरा तू जईब रोंवा रोंवा डहका देहब
बाटे लड़कपन करके छिनरपन आपन काम चला लेहब
जब दिल के दिल जान लिही ,सबका के आपन मान लिही
बुरबक लेखा ना राजा जी ,देहिया अकील से काम लिही
इंद्रधनुषी ये तन के पहेली दोसरा से सुलझा लेहब
पड़े ना तनिको फ़रक पिया ,तहरा उपस्थित रहला से
जोबन में घर अब बांबे करी तहरा चहला ना चहला से
तज के लाज लाँघ संकोच सब मर्यादा गिरा देहब
मछरी काई साँप घोंघा उहें रही जहाँ झील बा
सारा पड़ोस में चर्चा बाटे हमरा कहाँ पर तिल बा
अनगिनत अनलिखल पन्ना पर दोसर ज़िल्द चढ़ा लेहब
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