सोमवार, 27 जून 2016

सुननी ह - भोजपुरी कविता [डॉ मुकेश पाण्डेय ]

ख़ुश्बू फेर उड़ी बारूद के 
हवा में 
अभी तोप चली 
जंगल में बाघ चितन पर 
अभी हाथी के बचवन पर निशाना साधल जाई 
अभी खरगोश के बाल से 
बनी कूची आपन 
आव 
जश्न में हमनियो तनी झुमल जाव 
झूम के देखल जाव 
कि जंगल के उहे हिस्सा जहाँ बकुला टहलत रहे 
कि ओहि पोखर की नीचे 
सुननी ह 
यूरेनियम राखल बा 



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