ऊ रात जवन हमरा पर भारी बा
ओहि रात के ई तइयारी बा
दम साध के हम बईठल बानी
दम साध के ही बईठल बानी
अबहीं कुछऊ होते-होते
एह वक़्त के मतलब बो दिही
ई ज़ोर -ज़बर के हर क़िस्सा
इक रोज़ त मानी खो दिही
एक दिन बदल जाई ई दुनिया
हमरा जियते -जी सब होई
हमरा अखियन के आस-पास
अइसनो जे नईखे की कवनो
रफ़्तार अलग होई कतहुँ
जब दौर बदल जाला कतहुँ
चुटकी एक साथ बजावे से
अइसनो जे नईखे चुपे -चोरी
हम बुद्ध कहीं हो जाईब हो
अइसनो जे नईखे कि
सन्नाटा
कुछ आउर नाही गहराई हो
अइसनो जे नईखे बिन बोले
अल्फाज़ कहीं ख़ुश्बू दिही
अइसनो त नईखे चरे वाला
कुछ बीज कहीं पर बो दिही
एक चीज़ प ज़ोर लगईला से
ई सब ढांचा हिल जाई
तनी अउर कुरेद धरती के
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