आईल बिया हितई घूमे रहेले शहर टाटा
सिग्नल देत बिया छवड़ी लेके हरिहर दुपट्टा
चान खानी चमकतिया दुधवो से गोर हो
गउवा में होत बाटे एकरे नु शोर हो
देखि सुरतिया दिल में गड़तावे कांटा
सिग्नल देत बिया छवड़ी लेके हरिहर दुपट्टा
चढ़ जाले छत पर केशिया के झारे
अपना सुरतिया के खुबे संवारे
एकरा कठरा में जाने के सानी आंटा
सिग्नल देत बिया छवड़ी लेके हरिहर दुपट्टा
पाण्डेय मुकेश "नईखे काबू हो मन पर
ना जाने केकर हक़ बावे एकरा धन पर
बोलेला केहू त देखावेले चाटा
सिग्नल देत बिया छवड़ी लेके हरिहर दुपट्टा
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