गुरुवार, 2 जून 2016

भगवान हमके काहे ना मुरलिया बनवलें तोहार - डॉ मुकेश पाण्डेय

भगवान हमके काहे ना मुरलिया बनवलें तोहार 
तोहरा ओठवा से सट के छुवतीं ओठवा तोहार 
ईहे मन करेला हमार 

मिलन के बिना तरसे नयनवा तड़प रही हूँ बरसाने में 
गज़ब के क़िस्मत बा मुरली के मगन हुवे हो बजाने में 
प्यार के बिना तरसता सगरो सिंगार 
दिल धड़क रहल बा हमार 

खनकता चूड़ी सहे ना दुरी ये हो पिया तुम कहाँ हो 
चाहिले तोहके रब से भी ज़्यादा ख़ुश रहो जहाँ हो 
खोजेला  ई  अँखिया करे के दीदार 
आ जईता यमुना किनार 

       

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