सोमवार, 24 अगस्त 2015

महात्मा गांधी को याद करते हुवे - डॉ मुकेश पाण्डेय

हे  दीनबंधु शांतिदाता आपसे विनती यही 
प्रिय-गीत को जग में सुनावें आप आकर फिर वहीँ 
आपकी ही प्रेरणा से जाग जाएं वे सभी 
जो सो रहे हैं नींद में ,निशदिन बने भू-भार ही 
मिट जाये बापू भूमि से दुःख ग्लानि विपदा सर्वदा 
हम मानवों के दुःख से वैकुण्ठ बन जाये महि 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें