हे दीनबंधु शांतिदाता आपसे विनती यही
प्रिय-गीत को जग में सुनावें आप आकर फिर वहीँ
आपकी ही प्रेरणा से जाग जाएं वे सभी
जो सो रहे हैं नींद में ,निशदिन बने भू-भार ही
मिट जाये बापू भूमि से दुःख ग्लानि विपदा सर्वदा
हम मानवों के दुःख से वैकुण्ठ बन जाये महि
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