शनिवार, 12 सितंबर 2015

ओसिया में बदरी बदरिया में जाड़ बा - डॉ. मुकेश पाण्डेय

ओसिया में बदरी बदरिया में जाड़ बा 
सूत जा बलमुआ अंचरवा के आड़ बा 

एतना कुहेस बा कि केहु ना चिन्हाई 
लगवे पटाईल रह देंहिया दनाई 
केहु ना चिन्हाला दुअरा भसुरा भी खाढ़ बा 

डहरी  में आँखी एने - ओने तू गड़ईब 
डर बा की नए गाड़ी असवो लड़ईब 
सोचतानी हमरो जवनिया पहाड़ बा 

अईल ह त रात भर साथे साथे रह 
दुःख सुख सुन हमार अपनों भी कह 
देंह में दरद बा कमाई  तोहर डांड़ बा 

छव छव महीना पर घरे जो तू अईब 
सुब्हा हमार सईयां अउर तू बढ़ईब 
जानेनी मुकेश" तहार बहरो जोगाड़ बा 

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