सोमवार, 7 सितंबर 2015

वो हो क़ामयाब तो मुझको बधाई दे - डॉ. मुकेश पाण्डेय

या ख़ुदा निग़ाहों में ऐसी रसाई दे 
कि जिधर देखूँ तू ही तू दिखाई दे 
मेरे महबूब को अता कर ऐसा मुक़ाम 
कि वो हो क़ामयाब तो मुझको बधाई दे 

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