अपना वतन के माटी संदेश भेजावत बा
सुन के आज परदेसी तहार देश बोलावत बा
पीपल के छैयाँ पनघट नदिया तट निशदिन राह निहारे
दिन में सूरज पल-पल खोजे रात में ढूंढे चाँद सितारे
सूरत कबो न बिसरे हरमेश रोवावत बा
सुन के आज परदेसी तहार देश बोलावत बा
रात दिवाली की काली तहरा बिन सुना लागे होली
पिचकारी के रंग अंग पर लागे जइसे गोली
पावन पर्व दशहरा लंकेश मानवत बा
सुन के आज परदेसी तहार देश बोलावत बा
मदद करे खातिर हद में सरहद रस्ता ताकत बा रोजे
दूध के क़र्ज़ चुकावे ख़ातिर मातृभूमि तोहरा के खोजे
गीता के कृष्ण मुकेश" उपदेश सुनावत बा
सुन के आज परदेसी तहार देश बोलावत बा
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