नीम बन जईति ना कि मन करे नीम बन जईति ना
पतईया प जय मइया लिखवइति
कि मन करे नीम बन जईति ना
एतना छाया करीतीं माई के लागित नाही धूप जी
तनी कुम्हिलाइत नाहीं मईया के रूप जी
झुलुआ लगइति ना ,रेशम के डोरी बन्हवइति ना
कि रसे-रसे झुलुआ झूलइति ना
कि मन करे नीम बन जईति ना
कहतीँ त लवंग पानी ले आइत मलिनिया
लागीत दरबार रोज़ो फूटते किरिनियाँ
बाभना बोलइति ना ,कि शुभ-शुभ शंख फूंकवइति ना
कचहरी भोरहीं से लगवइति
कि मन करे नीम बन जईति ना
पाण्डेय मुकेश" से पचरा लिखवइति
दुधवा से माई राउर चरण धोवइति
कलशा धरइति ना ,मईया के जलशा करइति ना
कि पचरा मन भर खूब गवइति ना
कि मन करे नीम बन जईति ना
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