वाया पाण्डेयपुर चौराहा
मंगलवार, 25 अगस्त 2015
पलाश के फूल - डॉ मुकेश पाण्डेय
वन प्रांतर जल उठा
दहकते हुवे पलाश के फूलों से
हाय! कैसी आग लगी है
मेरे हिय में
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