कहाँ लुकवलु ना तू भंगिया कहाँ लुकवलु ना
गउरा साँचे बताव बतिया भंगिया कहाँ लुकवलु ना
सब कुछ जस के तस बाटे ,बस गाएब बा भांग के बोरी हो
का बाटे घर में जो बाहर के चोरवा आईल करे बोल चोरी हो
कहाँ छिपवलु ना तू भंगिया कहाँ लुकवलु ना
खोजत पागल भईल बा मतिया। भंगिया कहाँ लुकवलु ना
हंसी से तहरा पाता चलत बा तहरे हा ई करधानी हो
मिली ना भंगिया त ई अड़भंगिया छोड़ दिही अन्न पानी हो
पागल बनवलु ना मतिया -2
कुछु कल ना छूटी अदतिया , भंगिया कहाँ लुकवलु ना
भंगिया ह हमरो जिए के सहारा एकरा बिना ना रह पाइब हो
तहरा से अब नाही पिसे के कहब पाण्डेय मुकेश से पिसवाईब हो
जिया जरवलु ना सावन में जिया जरवलु ना
अईसन छोड़ तू कइल मजकिया। भंगिया कहाँ लुकवलु ना
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