शनिवार, 26 दिसंबर 2015

सईयां जल्दी आव ना - डॉ मुकेश पाण्डेय

ठिठुरे सेजरिया मोरा कांपेला रजईया ,सैयां जल्दी आव ना 
डाहें जड़वा मुदईया ,सईयां जल्दी आव ना 

गर्मी बितवनी कटनी पूरा बरसात हो 
जाड़ा में बुझाता नाही कटी एको रात हो 
चले शीतलहरी एकर नईखे कुछ उपइया , सैयां जल्दी आव ना 


रात भर बिछौना ओढ़ना तनी ना दनाला 
एके करे किकुरल-किकुरल भोर होई जाला 
छछने शरीरिया रात भर लागे ना ओंघइया ,सैया जल्दी आव ना 

ठंढा में लगे जदी रहे ना जोगाड़ हो 
मुकेश सहाई नाहीं अक्सर  ई जाड़ हो 
रह हमरा जरी हमार ठंढा के दवइया ,सैयां जल्दी आव ना 

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