लग रहा जैसे कि कोई वाद्य हूँ मैं
और मेरे तार कोई छेड़ता है !
कौन है जो मीड़ मेरी है सजाता ?
कौन मेरे सुरों को मुझसे गवाता
गीत में है शब्द मेरे,भाव मेरे ,
किन्तु इसके पार्श्व में है शक्ति कोई
वह जगाती है सुयश अन्तः करण का,
और मैं सब श्रेय लेता जा रहा हूँ
एक अभिनेता-सरीखा जी रहा हूँ
जो मुझे वरदान है वह दे रहा है
माध्यम से अधिक मुझको कुछ न समझो
एक कल्पित वाद्य हूँ,बस बज रहा हूँ

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