सोमवार, 17 अगस्त 2015

लग रहा जैसे कि कोई वाद्य हूँ मैं - डॉ. मुकेश पाण्डेय

लग रहा जैसे कि कोई वाद्य हूँ मैं 
और मेरे तार  कोई छेड़ता है !
कौन है जो मीड़ मेरी है सजाता ?
कौन मेरे सुरों को मुझसे गवाता 
Dr.Mukesh Pandey

गीत में है शब्द मेरे,भाव मेरे ,
किन्तु इसके पार्श्व में है शक्ति कोई 
वह जगाती है सुयश अन्तः करण का,
और मैं सब श्रेय लेता जा रहा हूँ 

एक अभिनेता-सरीखा जी रहा हूँ 
जो मुझे वरदान है वह दे रहा है 
माध्यम से अधिक मुझको कुछ न समझो 
एक कल्पित वाद्य हूँ,बस बज रहा हूँ 


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