बुधवार, 16 सितंबर 2015

भोजपुरी ग़ज़ल [2] : डॉ मुकेश पाण्डेय

ई फाटल करेजा सियल जाई कईसे 
दरद लेके दिल में जियल जाई कईसे 

पिरितिया के अमरित मिली आस रहे 
ज़हर दिहल उनकर पियल जाई कईसे 

अगर भेंट होई अकेला में उनसे 
मगर पहिले अइसन मिलल जाई कईसे 

जीवन के चमन में  पतझड़  समाईल 
अब फूल अइसन खिलल जाई कइसे 

मुहब्बत के मारल चेतवले रहन जा 
जवाब आख़िर उनके दिहल जाई कईसे  

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