केहु साजन के अपना इंतज़ार करता
मेहँदी हाथ में लगाके तन सिंगार करता
हरी हरी चूड़ियाँ त हरिहर साडी
तीज परब के बाटे फूल तईयारी
धरती भी हरिहर रंगा गईल बाड़ी
हर दुल्हिनियां सुनर लागतारी
केहु नयनन में काजर के धार करता
झूला प झूले गोरी कजरी के तान पर
मन के चिरईया आज बिया उड़ान पर
जेकरा रहाला ना आज उहो उपवास बा
अपना व्रत प ओके पूरा विस्वास बा
केहु आरती के थाल तईयार करता
पाण्डेय मुकेश'केतना निमन लागताटे
हिन्दू धरम के ई बड़ परब बाटे
हरितालिका के कथा कहतारें पंडित जी
पूरा परिवार संघे-संघे सुनताटे
केहु सईयां के अपना दीदार करता
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें