कवन मज़ा बा ओह गली में देखे नाहीं पईनी
हम पहिले त बुझत रहनी स्वर्ग में भी कुछ बा
दारू में त मजे मज़ा बा जब भी पियले बानी
तू कहेल छोड़ द पियल तहरा संघत में कुछ बा
बेरोज़गारी फईलल बा पढ़लो लिखला के बाद
कतहुँ केहु में कहाँ बा बात करे के लूर
कवलेज में त धूम मचल बा 'पास-पास' के
नोकरी माँगे जा त अफ़सर कहे 'दूर-दूर '
हिन्दू- मुस्लिम में हिन्द के नेव भी बा
अफ्तार में खजूर बा त सेव भी बा
'अल्लाह-अल्लाह' मियां लोग कहे बेशक
लेकिन एगो रंग 'बम-महादेव ' भी बा
हिन्दू-मुस्लिम दुनो एके
यानी दुनो हवे एशिआई
एकदेश एकबोली एकेकिस्मत
काहे नईख कहत कि ह भाई-भाई
एको रत्ती ऊ ना करीहें मरव्वत
ऊ अपना रुख से मुंह नाहीं मोड़िहें
जमराज कहीं जान बक्सीयो देवे पर
डागडर साहेब एको आना फ़ीस नाहीं छोड़ीहे
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें