मंगलवार, 15 सितंबर 2015

तब काहे उदास बाड़ [भोजपुरी ग़ज़ल ] - डॉ. मुकेश पाण्डेय

तू हमरा आस-पास  बाड़ 
तब   काहे    उदास   बाड़ 

बात करेल मरे जिए के 
तू   बिखरल एगो आस बाड़ 

हमहुँ डूबल बानी आसमान में 
तू  काहे    निराश बाड़ 

हम हईं टूटल पैमाना 
तू ख़ाली  गिलास बाड़  

हम दुःख से बानी सजल 
रंज के तू लिबास बाड़ 

अपना फ़ितरत के हम मारल 
अपना आदत के तू दास बाड़ 

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