मंगलवार, 15 सितंबर 2015

डॉ मुकेश पाण्डेय के भोजपुरी दोहा

प्यार हवे ना युद्ध हिंसा प्यार ना ह हथियार 
प्यार के आगे झुक गईल केतना केतना सरकार 
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प्यार कृष्ण के रूप ह जेके भजस रसखान 
प्यार जेईके मिल जाला उ बन जाला इंसान 
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प्यार हृदय के पीर ह प्यार नयन के नीर 
ढाई आख़र प्यार ह कहलें संत कबीर 
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प्यार ना बुझे छल कपट चोरी झूठ भा लूट 
प्यार पवित्र रिश्ता अमर जेकर डोर अटूट 
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प्यार में ओझल चेतना प्यार में गाएब चैन 
प्यार अश्रु अविरल विकल जेइमे भींजे नैन 

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