शनिवार, 26 दिसंबर 2015

ये बम भोला बाबा - गीत : डॉ मुकेश पाण्डेय

पंवुआ में फोड़ा परल कन्हवा पर छाला ये बम भोला बाबा 
अब नाहीं तनिको खडा भईल जाला ये बम भोला बाबा 


भूखल पियासल बानी थाकल बा देहियां 
कम नाही बाटे तबो जिया में सनेहिया 
दर्शन के प्यासी अंखिया लोर से लोराला ये बम भोला बाबा 

सच पर चलाईं हमके रउरे सहारा 
जिनगी से ज्यादे राउर भक्ति बा प्यारा 
भक्ति के लाज राखीं रउरे सहारा ये बम भोला बाबा 

रउरे से बाँचल बा धर्मी के धर्मा 
आईल बाड़ी रउरी  दुआरी पूनम वर्मा 
पाण्डेय मुकेश के खोली किस्मत के ताला ये बम भोला बाबा 


स्वर : पूनम वर्मा 
संगीत : तरुण तूफानी 
गीत : डॉ मुकेश पाण्डेय 


आव लगादी करुआ तेल - डॉ मुकेश पाण्डेय

ढेर पियब जो गांजा दिमाग होई फेल 
आव लगादी करुआ तेल 
ना त सईया ड्राईबर हो जाई झमेल 
आव लगादी करुआ तेल 


लागल बा जाम आजु हउवे सोमारी हो 
भीड़ काँवरियाँ के भईल बा भारी हो 
गाडी केहु में ठेकी त हो जाई जेल 
आव लगादी करुआ तेल 


हो गईल आगे सब पीछे के गाड़ी हो 
तू अभी चढ़ल ना सुइयों पहाड़ी हो 
भईल बाटे कवरियन के ठेलम ठेल 
आव लगादी करुआ तेल 

भंगिया कहाँ लुकवलु ना - डॉ मुकेश पाण्डेय

कहाँ लुकवलु ना तू भंगिया कहाँ लुकवलु ना 
गउरा साँचे बताव बतिया भंगिया कहाँ लुकवलु ना 

सब कुछ जस के तस बाटे ,बस गाएब बा भांग के बोरी हो 
का बाटे घर में जो बाहर के चोरवा आईल करे बोल चोरी हो 
कहाँ छिपवलु ना तू भंगिया कहाँ लुकवलु ना 
खोजत पागल भईल बा मतिया। भंगिया कहाँ लुकवलु ना 

हंसी से तहरा पाता चलत बा तहरे हा ई करधानी हो 
मिली ना भंगिया त ई अड़भंगिया छोड़ दिही अन्न पानी हो 
पागल बनवलु ना मतिया -2 
कुछु कल ना छूटी अदतिया , भंगिया कहाँ लुकवलु ना 


भंगिया ह हमरो जिए के सहारा एकरा बिना ना रह पाइब हो 
तहरा से अब नाही पिसे के कहब पाण्डेय मुकेश से पिसवाईब हो 
जिया जरवलु ना सावन में जिया जरवलु ना 
अईसन छोड़ तू कइल मजकिया।  भंगिया कहाँ लुकवलु ना 

सईयां जल्दी आव ना - डॉ मुकेश पाण्डेय

ठिठुरे सेजरिया मोरा कांपेला रजईया ,सैयां जल्दी आव ना 
डाहें जड़वा मुदईया ,सईयां जल्दी आव ना 

गर्मी बितवनी कटनी पूरा बरसात हो 
जाड़ा में बुझाता नाही कटी एको रात हो 
चले शीतलहरी एकर नईखे कुछ उपइया , सैयां जल्दी आव ना 


रात भर बिछौना ओढ़ना तनी ना दनाला 
एके करे किकुरल-किकुरल भोर होई जाला 
छछने शरीरिया रात भर लागे ना ओंघइया ,सैया जल्दी आव ना 

ठंढा में लगे जदी रहे ना जोगाड़ हो 
मुकेश सहाई नाहीं अक्सर  ई जाड़ हो 
रह हमरा जरी हमार ठंढा के दवइया ,सैयां जल्दी आव ना 

हरदी छुटल नाही - डॉ मुकेश पाण्डेय

पड़े रोज सर्दी कइलन गवाना  बेदर्दी हरदी छुटल नाही 
जईब का कसे लगल ये सईया वर्दी हरदी छुटल नाही 

हमरा सुरतिया के सोना झरी जइहें 
केतनो कमईब मन बड़ा पछितइहें 
गोर-गोरे गालवा पर पड़ जइहें जर्दी हरदी छुटल नाहीं


नाहीं जननी सजना सिपाही बाड़े रेल में 
कबो माल गाड़ी कबो चलेले रेल में 
छुट्टी तू बढ़ाल  नाहीं चली गुंडागर्दी हरदी छुटल नाही 


हमरी जिनिगिया के तू ही संघाती 
मुकेश पर छोड़ल सईयां जवनिया के थाती 
जननी ना बा बाड़ पिया एतना बेदर्दी हार्डी छुटल नाही  

गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

बा ख़ुदा बा ख़ुदा - डाॅ मुकेश पान्डेय

सारी दुनिया में कहीं आप सा कोई नहीं
ऐ मेरी जाने गज़ल ऐ मेरी जाने वफा
बा खुदा बा खुदा

आसमानों में है चर्चे आपके ऐ जाने जा
आपकी खुश्बू से महका है जहाने गुलशिता
आपका चेहरा कन्वल है कहती है वादे सबा
बा ख़ुदा बा ख़ुदा

आए हो जबसे नज़र में हम तो दीवाने हुए
दुनिया की हर शै से हम तो बेगाने हुए
आपके जैसा सनम है ना ही कोई दूसरा