वाया पाण्डेयपुर चौराहा
बुधवार, 26 अगस्त 2015
भोजपुरी मुक्तक [3] डॉ मुकेश पाण्डेय
आइहो ! दादा ई जिनगी हमार
एगो नाकामी के धारा बा
केहु के चाह में अबले जियल बानी
अब भगवान जाने का सहारा बा
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