बुधवार, 26 अगस्त 2015

भोजपुरी मुक्तक [२ ] डॉ मुकेश पाण्डेय

दउरिले ख्याल के पीछे 
लागे पागल हो गईल बानी 
हाय !बेहोशी में हम अबले 
तोहके आपन बुझत बानी 


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