चार सौ के नथुनी किन के बलमुआ बारह सौ के हमके बतावेला
हमरा के बुझे बुरबक देहाती एही से बुद्धू बनावेला
कहेला कि देख कर जनि चोना
हटे ई असली बाईस कैरेट के सोना
आईल बा छपरा बजारे से लेके दिल्ली के लेबुल लगावेला
कहेला कि पेन्हला पर लगबु तू रानी
लागी ई छलकी फेरु से जवानी
हमके बइठाके अपने हाथे नाकी में हमरा पेन्हावेला
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