जहिया से चल गईल सुधियो न लेवेल
बसल बाड़ जाके कवना खोह में
का ये सईयाँ ना अईब का हो ?
जरता जवनिया हिरोह में
एक दम बदल गईल सांचे तू-हु जाके
कवन मतिया मरलस चित-बदला खियाके
विरह में जरतानी -मरतानी याद में
तनिको ना बाड़ हमरा मोह में
का ये सईयाँ ना अईब का हो ?
जरता जवनिया हिरोह में
चोली कुर्ती भींज जाला लोरवे से चू के
हुके तोहरा अन्न पानी भीतरी ना ढुके
हथनी के देंह हमार नेह बिना गलल
तू बाड़ कवना टोह में
का ये सईयाँ ना अईब का हो ?
जरता जवनिया हिरोह में
पाण्डेय मुकेश " पईसा जिनगी भर कमइब
अभी वाला माजा राजा बाद में ना पइब
मुंहवा से गाड़ी आवे अगुवा ला हमके
कोढ़ फूटे ओकरा नोहे नोह् में
का ये सईयाँ ना अईब का हो ?
जरता जवनिया हिरोह में
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